पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका-ईरान तनाव कम करने की कोशिश
पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता कर रहा है। हाल ही में एक वार्ता की योजना बनाई गई थी जिसमें अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस भी शामिल होने वाले थे, लेकिन यह बातचीत स्थगित कर दी गई। इसी बीच, भारत में पहलगाम हमले की बरसी पर अमेरिकी सांसदों और नेताओं ने पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने की सलाह दी है। अमेरिकी सांसद ब्रैड शेरमन ने भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पाकिस्तान को लश्कर-ए-तैयबा पर नियंत्रण रखना चाहिए।
आतंकवाद पर एकजुटता
इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी अमेरिकी सांसदों और नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव को समाप्त करने की भी बात की गई।
ब्रैड शेरमन का बयान
ब्रैड शेरमन ने वॉशिंगटन डीसी में 'द ह्यूमन कॉस्ट ऑफ टेररिज्म' प्रदर्शनी में पहलगाम हमले का उल्लेख करते हुए कहा, 'आतंकियों ने लिंग और धर्म के आधार पर लोगों को विभाजित किया और उनकी हत्या की। यह मानवता के खिलाफ एक अपराध था। हमें इस अवसर का लाभ उठाकर पाकिस्तान से लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद पर कार्रवाई करने की मांग करनी चाहिए।'
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उन्होंने भारत और अमेरिका के संबंधों को 'नैचुरल पार्टनरशिप' बताया और कहा कि दोनों देशों को आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित करना होगा और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई करनी होगी।
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शेरमन ने पहलगाम हमले में मारे गए नेवी के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल का भी जिक्र किया, जो अपनी शादी के केवल 6 दिन बाद अपनी पत्नी के सामने मारे गए थे। मिशिगन की प्रतिनिधि लीजा मैकलेन ने कहा कि आतंकवाद नफरत का प्रतीक है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
