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पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सैनिकों का बंदी बनना: क्या है असली कहानी?

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें कई सैनिक बंदी अवस्था में हैं और अपनी रिहाई की गुहार लगा रहे हैं। यह वीडियो बीएलए द्वारा जारी किया गया है, जो सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। बीएलए का दावा है कि ये सैनिक उनके अभियान के दौरान पकड़े गए हैं। सरकार ने अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। बलूचिस्तान में दशकों से विद्रोह जारी है, और यह घटना क्षेत्र में बढ़ती असुरक्षा को दर्शाती है।
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पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सैनिकों का बंदी बनना: क्या है असली कहानी?

सुरक्षा हालात पर गंभीर सवाल


नई दिल्ली: बलूचिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत में चल रहे विद्रोह के बीच एक नया वीडियो सामने आया है, जिसने सुरक्षा स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अलगाववादी समूह बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें कई पाकिस्तानी सैनिक बंदी अवस्था में नजर आ रहे हैं और अपनी रिहाई की गुहार लगा रहे हैं।


इस वीडियो में वर्दी पहने सैनिक एक ऊबड़-खाबड़ इलाके में घुटनों के बल बैठे दिखाई दे रहे हैं। वे अपने सैन्य पहचान पत्र दिखाते हुए यह दावा कर रहे हैं कि उन्हें पाकिस्तानी सेना द्वारा सेवा संख्या दी गई थी और वे आधिकारिक रूप से तैनात थे। यह वीडियो सेना के पहले के उस बयान को चुनौती देता है, जिसमें किसी भी सैनिक के लापता या बंदी होने से इनकार किया गया था।


बीएलए का बयान

बीएलए का दावा


बीएलए के अनुसार, इन सैनिकों को उनके कथित अभियान "ऑपरेशन हीरो ऑफ 2.0" के दौरान पकड़ा गया। संगठन का कहना है कि यह अभियान बलूचिस्तान में चल रहे उनके विस्तारित विद्रोही अभियान का हिस्सा है, जिसमें 2025 के मध्य से राज्य बलों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है।


वीडियो में बंदी सैनिक अपनी यूनिट, सैन्य पहचान और राष्ट्रीय दस्तावेजों का उल्लेख करते दिखाई देते हैं। एक सैनिक यह कहते हुए सुना जा सकता है कि पाकिस्तान के लिए लड़ने के बावजूद सेना ने उन्हें "छोड़ दिया" है। बंदी कथित तौर पर सरकार और सैन्य नेतृत्व से बातचीत कर उनकी रिहाई सुनिश्चित करने की अपील भी कर रहे हैं।


कैदियों की अदला-बदली की मांग

कैदियों की अदला-बदली की मांग


बीएलए के हालिया बयानों में दावा किया गया है कि उसके पास 20 से अधिक लोग हिरासत में हैं। इनमें से कुछ को रिहा किया गया है, जिनमें कथित रूप से स्थानीय बलूच कर्मी शामिल हैं, जबकि नियमित सेना के जवानों को अब भी बंदी बनाकर रखा गया है।


संगठन ने कैदियों की अदला-बदली के लिए समय सीमा तय की है और मांग की है कि इस्लामाबाद, पाकिस्तानी हिरासत में रखे गए बलूच बंदियों को रिहा करे। बीएलए ने चेतावनी दी है कि ऐसा न होने पर वह अपने स्व-घोषित "बलूच राष्ट्रीय न्यायालय" के जरिए तथाकथित "अदालती फैसले" को लागू करेगा। हालांकि, पाकिस्तानी सरकार ने अब तक सैनिकों की गिरफ्तारी को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है।


बलूचिस्तान में विद्रोह का इतिहास

बलूचिस्तान में लंबे समय से जारी विद्रोह


बलूचिस्तान में दशकों से अलगाववादी आंदोलन जारी है। स्थानीय गुटों का आरोप है कि प्रांत की प्राकृतिक संपदा के दोहन और राजनीतिक उपेक्षा ने असंतोष को जन्म दिया है। हाल के वर्षों में हिंसा में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।


विद्रोही संगठनों ने सड़क किनारे विस्फोट, सुरक्षा काफिलों पर हमले और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाने जैसी कार्रवाइयों को अंजाम दिया है। मार्च 2025 में जाफर एक्सप्रेस यात्री ट्रेन के अपहरण की घटना ने भी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर दिया था।


सरकार की प्रतिक्रिया

सरकार का रुख और बढ़ती अनिश्चितता


पाकिस्तानी सरकार बीएलए को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुकी है और उसके साथ किसी भी तरह की बातचीत से इनकार करती रही है। ताजा वीडियो और बंधक संकट ने बलूचिस्तान की मौजूदा सुरक्षा स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।


क्षेत्र में स्वतंत्र पुष्टि की सीमित उपलब्धता के कारण घटनाओं की पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह प्रकरण बलूचिस्तान में जारी संघर्ष और राज्य की सत्ता को मिल रही चुनौती को एक बार फिर उजागर करता है।