पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता की विवादास्पद ब्रीफिंग ने उठाए सवाल
पाकिस्तान की सैन्य ब्रीफिंग पर उठे सवाल
पाकिस्तान के अंतर-सेवा जनसंपर्क महानिदेशक (डीजी आईएसपीआर) द्वारा हाल ही में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग ने सुरक्षा और राजनयिक समुदाय में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। इस ब्रीफिंग में सैन्य अधिकारी ने अनौपचारिक भाषा का प्रयोग किया, जिससे उनकी पेशेवर छवि पर सवाल उठने लगे हैं। डीजी आईएसपीआर ने कई बार बोलचाल की भाषा और उपहास भरे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसमें 'मज़ा न कराया तो पैसे वापस' जैसी टिप्पणियाँ शामिल थीं। उन्होंने भारत और अफगानिस्तान को भी धमकियाँ दीं। शीर्ष खुफिया सूत्रों के अनुसार, इस तरह की निम्न स्तरीय भाषा का प्रयोग पाकिस्तानी आधिकारिक सैन्य ब्रीफिंग में पेशेवरता की कमी को दर्शाता है।
चौधरी ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान को 2026 तक एक कठोर राष्ट्र बनना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत कभी पाकिस्तान के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करेगा। चौधरी ने आगे कहा कि दुश्मन चाहे किसी भी दिशा से आए, उनसे निपटा जाएगा। मजा न कराया तो पैसे वापस। डीजी आईएसपीआर की प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐतिहासिक रूप से भारत की आलोचना का मंच रही है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वर्तमान लहजा एक गुणात्मक बदलाव को दर्शाता है। यह अब वैचारिक शत्रुता से हटकर शिकायत-आधारित उपहास की ओर बढ़ रहा है।
औपचारिक सैन्य या राजनयिक भाषा के बजाय व्यंग्यात्मक भाषा का प्रयोग आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है। डीजी आईएसपीआर ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान को 2026 तक एक "कठोर राष्ट्र" बनना होगा और यह भी कि भारत पाकिस्तान के अस्तित्व को कभी मान्यता नहीं देगा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान का राजनीतिक नेतृत्व, सैन्य प्रतिष्ठान और जनता की मानसिकता टकराव में एकजुट हैं।
सूत्रों का कहना है कि यह बयान जानबूझकर नाटकीय और टकरावपूर्ण था।
शीर्ष खुफिया सूत्रों का मानना है कि ये टिप्पणियाँ पाकिस्तान की सेना की भारत के प्रति शत्रुता की खुली स्वीकृति हैं, जिससे इस्लामाबाद की कूटनीतिक अस्पष्टता खत्म हो जाती है। उनका तर्क है कि यह भाषा कूटनीतिक संवाद में असमर्थता को उजागर करती है और आंतरिक तनाव से प्रेरित मानसिकता को दर्शाती है।
At the end…What did he sayyyyy
— Shubhangi Sharma (@ItsShubhangi) January 6, 2026
pic.twitter.com/Nai0Lk5BIw
