पाकिस्तान ने 10 मई को ‘मरका-ए-हक दिवस’ मनाने की घोषणा की
‘मरका-ए-हक दिवस’ का ऐलान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हर साल 10 मई को ‘मरका-ए-हक दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। पिछले साल भारत के साथ हुए चार दिवसीय संघर्ष को इस्लामाबाद ने ‘मरका-ए-हक’ नाम दिया था, और इस घटना की पहली वर्षगांठ पर रविवार को एक समारोह का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में शहबाज ने कहा कि पाकिस्तानी सशस्त्र बलों ने दुश्मन को एक ‘ऐतिहासिक और उचित जवाब’ दिया। पिछले साल 7 मई को भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए गए।
हमलों का प्रभाव और प्रतिक्रिया
इन हवाई हमलों में कम से कम 100 आतंकवादियों को मार गिराया गया। इसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए, लेकिन भारतीय सेना ने अधिकांश हमलों को विफल कर दिया। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद, 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी और शत्रुता समाप्त हो गई।
प्रधानमंत्री शहबाज ने इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की सराहना की। उन्होंने संघर्ष के दौरान राजनयिक और राजनीतिक समर्थन देने के लिए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग का भी धन्यवाद किया।
राष्ट्रपति का संबोधन और श्रद्धांजलि
भारत का कहना है कि सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति दोनों पक्षों के बीच सीधे हुई थी। कार्यक्रम में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि इस संघर्ष ने यह साबित किया है कि जब पूरा देश पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के साथ एकजुट होता है, तो वे क्या कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री के संबोधन की शुरुआत में एक मिनट का मौन रखकर संघर्ष के दौरान मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई।
