Newzfatafatlogo

पाकिस्तान में आसिम मुनीर के बयान से भड़का शिया-सुन्नी विवाद: क्या है असली वजह?

पाकिस्तान में सेना प्रमुख आसिम मुनीर के एक बयान ने शिया समुदाय में नाराजगी पैदा कर दी है, जिससे सांप्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उनकी टिप्पणी ने पुरानी समस्याओं को फिर से उभार दिया है, जो पाकिस्तान की गहरी सामाजिक दरार को उजागर करती है। शिया समुदाय को भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ता है, जबकि देश में सुन्नी मुसलमान बहुसंख्यक हैं। जानिए इस विवाद की जड़ें और पाकिस्तान में धार्मिक असमानता की स्थिति के बारे में।
 | 
पाकिस्तान में आसिम मुनीर के बयान से भड़का शिया-सुन्नी विवाद: क्या है असली वजह?

सांप्रदायिक तनाव की नई लहर


पाकिस्तान में एक बार फिर सांप्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस बार सेना प्रमुख आसिम मुनीर के एक बयान ने शिया समुदाय में नाराजगी पैदा कर दी है। ईरान में अमेरिका और इजरायल के हमलों पर उनकी टिप्पणी ने पुरानी समस्याओं को फिर से उभार दिया है।


आसिम मुनीर का विवादास्पद बयान

आसिम मुनीर ने शिया धर्मगुरुओं को यह कहकर चौंका दिया कि यदि उन्हें ईरान की इतनी चिंता है, तो उन्हें वहीं जाकर रहना चाहिए। यह बयान सीधे तौर पर शिया समुदाय को लक्षित करता है, जिसके बाद देशभर में बहस छिड़ गई है और शिया समुदाय में असंतोष की आवाजें उठने लगी हैं।


पाकिस्तान की सामाजिक दरार

गहरी सामाजिक विभाजन


यह मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान में दशकों से विद्यमान गहरी सामाजिक दरार को उजागर करता है। यहाँ सुन्नी मुसलमान बहुसंख्यक हैं और सत्ता में उनकी पकड़ मजबूत है। इसके विपरीत, शिया समुदाय को अक्सर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। पाकिस्तान, ईरान के बाद, दुनिया में शिया आबादी वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है, जहाँ लगभग 2.5 से 4 करोड़ शिया रहते हैं, फिर भी उन्हें समानता का दर्जा नहीं मिलता।


शियाओं के खिलाफ हिंसा

कट्टरपंथी संगठनों का प्रभाव


पाकिस्तान में कई कट्टरपंथी समूह खुलेआम शियाओं के खिलाफ भड़काऊ भाषण देते हैं और उन्हें 'काफिर' कहकर संबोधित करते हैं। ऐसे माहौल में शिया समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस करता है। गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे क्षेत्रों में, जहाँ शियाओं की बड़ी संख्या है, विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और फायरिंग की घटनाएँ भी सामने आई हैं। कराची में भी इसी तरह के तनाव की घटनाएँ होती रही हैं।


सांप्रदायिक सौहार्द की कमी

पाकिस्तान में शिया समुदाय के धार्मिक आयोजनों, विशेषकर मुहर्रम के जुलूस, भारी सुरक्षा के बीच आयोजित किए जाते हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि वहाँ सांप्रदायिक सौहार्द कितना कमजोर है। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना खुद शिया समुदाय से जुड़े इस्माइली खोजा मत के अनुयायी थे, फिर भी आज शियाओं को समानता और सुरक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।