पाकिस्तान में इफ्तार मीटिंग पर विवाद: आर्मी चीफ और शिया उलेमा के बीच तनाव
पाकिस्तान में इफ्तार मीटिंग का विवाद
नई दिल्ली: पाकिस्तान में एक महत्वपूर्ण इफ्तार मीटिंग अब एक राष्ट्रीय विवाद का कारण बन गई है। यह बैठक 19 मार्च को रावलपिंडी में आयोजित की गई थी, जिसमें पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर और प्रमुख शिया उलेमा शामिल हुए। हालांकि, इस मीटिंग का माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। सूत्रों के अनुसार, आर्मी चीफ ने लगभग एक घंटे तक अपनी बात रखी, जबकि उलेमा को अपनी बात रखने का कोई अवसर नहीं मिला।
इस विवाद की जड़ आर्मी चीफ का एक कथित बयान है, जिसमें उन्होंने शिया उलेमा से कहा कि यदि उन्हें ईरान से इतना लगाव है, तो उन्हें वहां चले जाना चाहिए। इस टिप्पणी को शिया समुदाय ने अपनी देशभक्ति पर सीधा हमला माना है। कई शिया नेताओं ने इसे अपमानजनक करार दिया और कहा कि यह संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी की भाषा के अनुरूप नहीं है। इस घटना ने पाकिस्तान में सांप्रदायिक संवेदनशीलता और सेना-धार्मिक नेतृत्व के रिश्तों पर नई बहस छेड़ दी है।
तनावपूर्ण मीटिंग का माहौल
सूत्रों के अनुसार, मीटिंग के दौरान आर्मी चीफ ने लगभग एक घंटे तक लगातार अपनी बात रखी, जबकि उलेमा को बोलने का कोई मौका नहीं मिला। उपस्थित लोगों ने बताया कि पूरा माहौल तनाव से भरा हुआ था और संवाद पूरी तरह एकतरफा था। डिनर के बाद दूसरी बैठक का वादा किया गया था, लेकिन आर्मी चीफ अचानक चले गए, जिससे शिया नेताओं में और असंतोष बढ़ गया।
शिया समुदाय की प्रतिक्रिया
मौलाना हसनैन अब्बास गर्देजी ने कहा कि इस तरह की भाषा एक संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी के लिए उचित नहीं है। अल्लामा नजीर अब्बास तकवी ने भी कहा कि उन्होंने बैठक में कई बार संवाद की कोशिश की, लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया। शिया नेताओं ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि पाकिस्तान के निर्माण में शिया समुदाय की अहम भूमिका रही है और उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाना गलत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मक्का, मदीना, इराक और ईरान जैसे धार्मिक स्थलों से भावनात्मक जुड़ाव होना सामान्य है और इसे देशभक्ति से जोड़ना अनुचित है।
जिया-उल-हक के दौर से तुलना
सैयद जवाद नकवी ने आर्मी चीफ के रवैये पर सीधा हमला बोला और इसे जनरल जिया-उल-हक के दौर की नीतियों से जोड़ दिया। उनका कहना था कि जिस तरह उस दौर में शिया समुदाय पर दबाव बनाया गया था, उसी तरह का माहौल फिर बनता दिख रहा है। नकवी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अब देशभक्ति की परिभाषा को अपने हिसाब से तय कर रहा है, जहां किसी धार्मिक या वैचारिक जुड़ाव को शक की नजर से देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ धार्मिक या भावनात्मक संबंध को देश के खिलाफ खड़ा करना गलत नैरेटिव है।
उलेमा का एक बड़ा आरोप यह भी है कि सेना की कुछ रणनीतिक नीतियों, खासकर विदेशी ताकतों को सैन्य ठिकाने देने जैसे फैसलों पर सवाल उठाने वालों को दबाने की कोशिश हो रही है।
