पाकिस्तान में तेल संकट: ईरान के हमले के बाद बढ़ी कीमतें और बढ़ती भीड़
तेल संकट का गहराना
नई दिल्ली : वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का संकट बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए, जिसके परिणामस्वरूप मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गई। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, और कतर तथा कुवैत जैसे देशों ने तेल की आपूर्ति रोक दी। इसका सीधा प्रभाव वैश्विक कीमतों पर पड़ा, जिससे पाकिस्तान जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों में हाहाकार मच गया। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, और सरकार ऊर्जा बचाने के पुराने उपायों को फिर से लागू करने पर विचार कर रही है। यह संकट कब तक चलेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व
28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध ने तेल बाजार में हलचल मचा दी। ब्रेंट क्रूड की कीमत 25 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि डब्ल्यूटीआई की कीमत भी 112 डॉलर के पार चली गई। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। ईरान ने टैंकरों की आवाजाही पर रोक लगा दी, और कतर तथा कुवैत ने सप्लाई बंद करने का ऐलान किया, जिससे कीमतों में तेजी आई।
पाकिस्तान में स्थिति गंभीर
पाकिस्तान में हालात सबसे खराब हैं। सरकार ने पेट्रोल की कीमत 336 रुपये और हाई स्पीड डीजल की कीमत 321 रुपये प्रति लीटर कर दी है। कराची और लाहौर जैसे शहरों में पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगी हुई है, और लोग घंटों तक इंतजार कर रहे हैं। एक बार में 50 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी ने आम जनता को परेशान कर दिया है, जिससे परिवहन और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
कोविड जैसे उपायों की आवश्यकता
शहबाज शरीफ की सरकार अब कोविड-19 के दौरान लागू ऊर्जा बचत नियमों को फिर से लागू करने पर विचार कर रही है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, एक तीन चरणों वाली योजना तैयार की जा रही है। पहले चरण में सरकारी कार्यालयों में काम कम किया जाएगा। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक आपात बैठक आयोजित की जाएगी, जिसका उद्देश्य आयातित तेल और गैस की मांग को कम करना है।
सरकार की योजना
इस योजना में वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन कक्षाओं की शुरुआत का प्रस्ताव है। सरकारी बैठकें ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी, और स्वास्थ्य क्षेत्र को छोड़कर अन्य कार्यालयों में स्टाफ की संख्या सीमित रहेगी। सार्वजनिक छुट्टियों को बढ़ाया जा सकता है, और पेट्रोल-डीजल की जमाखोरी और तस्करी पर कड़ी नजर रखी जाएगी। आवश्यक क्षेत्रों को पहले एलएनजी और एलपीजी की आपूर्ति की जाएगी।
तेल भंडार के दावे निराधार
पिछले वर्ष पाकिस्तान ने अरब सागर में विशाल तेल भंडार मिलने का दावा किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पाकिस्तान के तेल रिजर्व पर डील का ऐलान किया था, जिसमें कहा गया था कि एक दिन पाकिस्तान भारत को तेल बेच सकता है। लेकिन अब इस संकट के बीच ये दावे निराधार साबित हो रहे हैं। 2020 की यूसएआईडी अध्ययन पर आधारित रिपोर्टों में भी कोई ठोस रिजर्व नहीं पाया गया।
