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पाकिस्तान में मारा गया आतंकवादी अरजुमंद गुलजार डार: जानिए उसकी कहानी

अरजुमंद गुलजार डार, जिसे हमजा बुरहान के नाम से जाना जाता है, की हाल ही में पाकिस्तान में हत्या कर दी गई। वह पुलवामा का निवासी था और लंबे समय से आतंकवादी गतिविधियों में संलग्न था। जानें उसकी कहानी, कैसे वह अल-बद्र में शामिल हुआ और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चुनौती बना। इस लेख में हम उसके जीवन और गतिविधियों पर एक नज़र डालेंगे।
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पाकिस्तान में मारा गया आतंकवादी अरजुमंद गुलजार डार: जानिए उसकी कहानी

पुलवामा का आतंकवादी नेटवर्क का चेहरा


नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले से निकलकर पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों का एक प्रमुख चेहरा अरजुमंद गुलजार डार, जिसे हमजा बुरहान के नाम से जाना जाता है, की मौत हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मुजफ्फराबाद में एक अज्ञात हमलावर ने उसे गोली मार दी। वह लंबे समय से भारत के खिलाफ गतिविधियों में संलग्न था और आतंकी संगठन अल-बद्र से जुड़ा हुआ था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां उसकी गतिविधियों पर कई वर्षों से नजर रख रही थीं।


हमजा बुरहान का मूल स्थान

अरजुमंद गुलजार डार पुलवामा के खरबतपोरा रत्नीपोरा क्षेत्र का निवासी था। कहा जाता है कि उसने वैध दस्तावेजों के माध्यम से पाकिस्तान का रुख किया और वहां पहुंचकर अल-बद्र में शामिल हो गया। धीरे-धीरे, उसकी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका बन गई और उसे एक सक्रिय कमांडर के रूप में मान्यता मिली।


पाकिस्तान में रहते हुए, उसने खुद को एक शिक्षक के रूप में प्रस्तुत किया ताकि उसकी असली गतिविधियों पर किसी को संदेह न हो। हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि वह आतंकवादी नेटवर्क का संचालन कर रहा था और पाकिस्तान से भारत विरोधी अभियानों को अंजाम दे रहा था।


भारत सरकार द्वारा आतंकवादी घोषित

भारत सरकार ने उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, यानी यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया। गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार, वह जम्मू-कश्मीर में युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और आतंकी संगठनों में भर्ती कराने में सक्रिय था। जांच एजेंसियों का कहना है कि वह सोशल मीडिया और स्थानीय संपर्कों के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश करता था।


आतंकवादी मामलों में संलिप्तता

हमजा बुरहान का नाम कई आतंकवादी मामलों में सामने आया है। पुलवामा में ओवर ग्राउंड वर्कर्स के पास से विस्फोटक बरामद होने की घटनाओं में उसकी भूमिका की जांच की गई थी। इसके अलावा, नवंबर 2020 में सीआरपीएफ जवानों पर हुए ग्रेनेड हमले से भी उसका संबंध जोड़ा गया था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह आतंकियों को आर्थिक मदद, हथियार और लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रदान करने में भी शामिल था।


सुरक्षा हलकों में, हमजा बुरहान को कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था। भारतीय एजेंसियों का मानना था कि वह केवल एक आतंकवादी नहीं, बल्कि एक ऐसा ऑपरेटर था जो सीमा पार से आतंकवादी नेटवर्क को मजबूत करने में लगा हुआ था।