पाकिस्तानियों के लिए यूएई से निकासी: एक नया संकट
पाकिस्तान के नागरिकों की दुर्दशा एक नई ऊंचाई पर पहुंच गई है, जब यूएई ने हजारों पाकिस्तानी शिया मुसलमानों को अचानक देश से बाहर निकाल दिया। इस संकट के पीछे पाकिस्तान की डबल नीति और मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का बड़ा हाथ है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की चिंता भी बढ़ रही है, जबकि पाकिस्तान की सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए है। जानिए इस गंभीर स्थिति के बारे में और क्या है इसके पीछे की सच्चाई।
| May 27, 2026, 19:37 IST
पाकिस्तानियों की दुर्दशा और यूएई से निकासी
कर्ज में डूबे पाकिस्तान के नागरिक जब भुखमरी से परेशान होते हैं, तो वे खाड़ी देशों की ओर रुख करते हैं। दुबई और सऊदी अरब में काम करके वे अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। लेकिन जब उन्हें अपनी सरकार की गलत नीतियों का शिकार होना पड़ता है, तो उनका दर्द और बढ़ जाता है। मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच, पाकिस्तानियों पर एक नया संकट आ पड़ा है। यूएई ने हजारों पाकिस्तानी शिया मुसलमानों को अचानक देश से बाहर निकाल दिया। उन्हें न तो सामान पैक करने का समय मिला और न ही अपनी मेहनत की कमाई समेटने का मौका। केवल एक जोड़ी कपड़ों में उन्हें फ्लाइट में बैठाकर वापस भेज दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, यूएई ने 28 फरवरी से अब तक 7500 से अधिक पाकिस्तानी शियाओं को बाहर निकाला है।
यूएई का कड़ा कदम और पाकिस्तान की चुप्पी
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। बिना नौकरी, बिना सामान और बिना अपनी जमा पूंजी के पाकिस्तानियों को वापस भेजा गया। यूएई ने यह कदम क्यों उठाया और पाकिस्तान इस पर चुप क्यों है? इसका उत्तर पाकिस्तान की डबल नीति में छिपा है। एक ओर, पाकिस्तान ईरान के साथ संबंध बनाता है, जबकि दूसरी ओर, वह अमेरिका और यूएई के सामने झुकता है। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच, पाकिस्तान की इस डबल स्टैंडर्ड नीति का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। सुरक्षा कारणों और ईरान युद्ध के बढ़ते तनाव के चलते यूएई ने यह कड़ा रुख अपनाया।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की चिंता
इस पूरे मामले पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी ध्यान दिया है। ह्यूमन राइट्स वॉच के उपनिदेशक माइकल पेज ने इन घटनाओं को चिंताजनक बताया है और जांच शुरू कर दी है। जेनेवा स्थित मानवाधिकार समूह के अधिकारी फला सैयद का कहना है कि यूएई में ऐसी घटनाएं पहले भी हुई हैं, लेकिन हाल के दिनों में इनमें तेजी आई है। पाकिस्तान की जनता आज अपने नेताओं की गलत नीतियों का खामियाजा भुगत रही है। जब सरकार कूटनीति में डबल गेम खेलती है, तो निर्दोष नागरिकों को इसका दुष्परिणाम भुगतना पड़ता है।
