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पुतिन ने ईरान और इजराइल के नेताओं से की बातचीत, क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति और इजराइल के प्रधानमंत्री के साथ फोन पर बातचीत की, जिसमें अमेरिका की धमकियों के बीच पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट पर चर्चा की गई। पुतिन ने क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का आह्वान किया। इस बातचीत में ईरान और पूरे क्षेत्र में तनाव को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। अमेरिकी विशेष दूत ने भी ईरान के समक्ष वाशिंगटन की मांगों को स्पष्ट किया। जानें इस महत्वपूर्ण वार्ता के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
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पुतिन ने ईरान और इजराइल के नेताओं से की बातचीत, क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा

पुतिन की बातचीत से क्षेत्रीय संकट पर चर्चा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ फोन पर बातचीत की। इस बातचीत का उद्देश्य अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले की धमकी के बीच पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट पर चर्चा करना था।


रूसी सरकार द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पुतिन ने क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का आह्वान किया और मध्यस्थता के लिए रूस की तत्परता व्यक्त की।


विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है कि पुतिन और नेतन्याहू के बीच बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया और ईरान की स्थिति पर चर्चा की गई।


इसमें यह भी कहा गया कि पुतिन और पेजेश्कियान ने ईरान और पूरे क्षेत्र में स्थिति को शीघ्र सामान्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यमों से उभरते मुद्दों को सुलझाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।


क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि ईरान और पश्चिम एशिया में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण है और राष्ट्रपति तनाव कम करने के लिए प्रयासरत हैं।


रूसी समाचार एजेंसी ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने ईरान के समक्ष वाशिंगटन की मांगों को स्पष्ट किया।


विटकॉफ ने फ्लोरिडा में आयोजित एक सम्मेलन में कहा, 'मुझे उम्मीद है कि कूटनीतिक समाधान निकलेगा। चार मुद्दे हैं: परमाणु संवर्धन और मिसाइलें, जिन्हें कम करने की आवश्यकता है।'


उन्होंने आगे कहा, 'अगर वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में लौटना चाहते हैं, तो हम इन चार मुद्दों को कूटनीतिक रूप से हल कर सकते हैं।'