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बलूच नेता मीर यार बलूच का भारत के लिए समर्थन: पाकिस्तान-चीन गठजोड़ पर गंभीर चेतावनी

बलूचिस्तान के नेता मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक पत्र भेजकर पाकिस्तान और चीन के बढ़ते गठजोड़ पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। उन्होंने बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन और पाकिस्तान-चीन आर्थिक गलियारे (CPEC) के पीछे छिपे सैन्य उद्देश्यों का जिक्र किया। बलूच ने भारत से अपील की है कि वह इस स्थिति को गंभीरता से ले और बलूच जनता की आवाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन दे। जानें इस पत्र में और क्या कहा गया है।
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बलूच नेता मीर यार बलूच का भारत के लिए समर्थन: पाकिस्तान-चीन गठजोड़ पर गंभीर चेतावनी

मीर यार बलूच का पत्र


बलूचिस्तान के प्रमुख मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक पत्र भेजकर भारत के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। इस पत्र में उन्होंने पाकिस्तान की आंतरिक समस्याओं, बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन और पाकिस्तान-चीन के बीच बढ़ती नजदीकियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मीर यार बलूच का कहना है कि ये घटनाएं केवल बलूचिस्तान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती हैं।


पाकिस्तान पर गंभीर आरोप

पत्र में मीर यार बलूच ने पाकिस्तान पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि बलूचिस्तान के लोग पिछले 79 वर्षों से आतंक और दमन का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बलूच जनता की आवाज को लगातार दबाया गया है और उनकी बुनियादी आज़ादी छीन ली गई है। बलूच नेता ने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि इस समस्या का समाधान किया जाए, ताकि बलूचिस्तान के लोगों को स्थायी शांति और आत्मनिर्णय का अधिकार मिल सके।


चीन-पाकिस्तान गठजोड़ पर चेतावनी

मीर यार बलूच ने पत्र में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और चीन इस परियोजना को अंतिम चरण में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन इसके पीछे केवल आर्थिक उद्देश्य नहीं हैं। बलूच नेता का दावा है कि इस परियोजना के माध्यम से चीन अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की योजना बना रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बलूचिस्तान में स्थानीय प्रतिरोध को मजबूत नहीं किया गया, तो भविष्य में वहां चीनी सैनिकों की तैनाती हो सकती है।


क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता

मीर यार बलूच के अनुसार, बलूचिस्तान गणराज्य पाकिस्तान और चीन के बढ़ते गठबंधन को खतरनाक मानता है। उनका कहना है कि इससे न केवल बलूचिस्तान की संप्रभुता को खतरा है, बल्कि पूरे क्षेत्र में अस्थिरता भी बढ़ सकती है। उन्होंने भारत से अपील की कि वह इस स्थिति को गंभीरता से समझे और बलूच जनता की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर समर्थन दे।


पाकिस्तान और चीन का खंडन

हालांकि, पाकिस्तान और चीन ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। दोनों देशों का कहना है कि CPEC पूरी तरह से एक आर्थिक परियोजना है, जिसका उद्देश्य विकास और व्यापार को बढ़ावा देना है, न कि सैन्य विस्तार। भारत ने हमेशा CPEC का विरोध किया है, क्योंकि यह परियोजना पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर से होकर गुजरती है, जिसे भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।