बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की मांग: चीन की सैन्य तैनाती का खतरा
बलूचिस्तान में संभावित बदलाव
पाकिस्तान का बलूचिस्तान क्षेत्र वर्तमान में गंभीर परिस्थितियों का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र भविष्य में दुनिया का 196वां देश बन सकता है। बलूचिस्तान के नेता मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी है कि चीन बलूचिस्तान में अपनी सेना तैनात कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह न केवल बलोचियों के लिए, बल्कि भारत के लिए भी एक गंभीर खतरा होगा।
चीन की संभावित सैन्य तैनाती
पत्र में बलोच नेता ने कहा कि यदि बलूचिस्तान की सुरक्षा और सैन्य क्षमताओं को मजबूत नहीं किया गया, तो चीन आने वाले महीनों में अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि 6 करोड़ बलोच लोगों की इच्छा के बिना बलूचिस्तान में चीनी सैनिकों की उपस्थिति भारत और बलूचिस्तान दोनों के लिए एक गंभीर चुनौती होगी।
इतिहास और संघर्ष
बलूचिस्तान का इतिहास भी संघर्ष से भरा हुआ है। 1948 में, जब बलूचिस्तान ने स्वतंत्रता की घोषणा की थी, तब पाकिस्तान ने बलूचिस्तान पर कब्जा कर लिया। तब से बलोच समाज पाकिस्तान के खिलाफ प्रतिरोध कर रहा है। पिछले 75 वर्षों में, पाकिस्तानी सेना ने बलोचियों के खिलाफ कई दमनकारी उपाय किए हैं। यदि चीनी सेना बलूचिस्तान में तैनात होती है, तो यह संघर्ष और भी कमजोर हो जाएगा।
भारत और बलूचिस्तान के संबंध
मीर यार ने भारत सरकार की आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों की सराहना की है और कहा है कि भारत और बलूचिस्तान के बीच संबंध मजबूत होने चाहिए। उन्होंने भारत से अपील की है कि वह चीन की संभावित सैन्य तैनाती के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाए। बलूच नेता ने हाल ही में पीएम मोदी को पत्र लिखकर बलूचिस्तान का दूतावास खोलने की मांग की थी।
भविष्य की संभावनाएं
1947 में भारत के विभाजन के समय बलूचिस्तान ने स्वतंत्रता की घोषणा की थी, लेकिन पाकिस्तान ने इसे बलात् कब्जा कर लिया। बलोच राष्ट्रवादियों ने इस कब्जे को कभी स्वीकार नहीं किया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बलूच नेता मीर यार की मांग पर भारत क्या निर्णय लेता है।
