बांग्लादेश का नया बैराज प्रोजेक्ट: भारत की चिंताओं के बीच चीन से फंडिंग की उम्मीद
बांग्लादेश का बैराज निर्माण का निर्णय
नई दिल्ली: बांग्लादेश ने भारत की चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए दो प्रमुख नदियों पर बैराज बनाने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने पद्मा और तीस्ता नदी पर बैराज प्रोजेक्ट की शुरुआत की घोषणा की है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वे जल्द ही चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं।
गाजीपुर में महत्वपूर्ण घोषणा
गाजीपुर में एक कार्यक्रम के दौरान, रहमान ने स्पष्ट किया कि बीएनपी सरकार दोनों बैराजों पर कार्य प्रारंभ करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि तीस्ता मुद्दे पर बीएनपी ने सबसे अधिक प्रयास किए हैं। सरकार ने पहले ही पद्मा बैराज को मंजूरी दे दी है, और अब तीस्ता पर भी कार्य तेज किया जाएगा।
चीन से वित्तीय सहायता की उम्मीद
प्रधानमंत्री रहमान जून के अंत में चीन की यात्रा करेंगे, जहां तीस्ता बैराज सहित कई बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय सहायता की चर्चा हो सकती है। इस प्रोजेक्ट में अरबों डॉलर का निवेश होने की संभावना है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री पहले ही चीन से औपचारिक सहायता मांग चुके हैं।
सूखे और फरक्का बैराज का संदर्भ
रहमान ने कहा कि सूखे के मौसम में बांग्लादेश को पर्याप्त जल नहीं मिल पाता। उन्होंने भारत के फरक्का बैराज को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इससे उनके क्षेत्रों में समुद्री खारा पानी घुस रहा है, जिससे सुंदरबन के जंगल और जीव-जंतु प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बैराज निर्माण का उद्देश्य बताया कि मॉनसून का अतिरिक्त जल संग्रहित कर सूखे में किसानों को उपलब्ध कराया जा सके।
भारत के लिए चिंता का विषय
तीस्ता नदी भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के निकट स्थित है। इस क्षेत्र में चीनी कंपनियों और इंजीनियरों की उपस्थिति भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।
भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारा समझौता 2011 से लंबित है। पश्चिम बंगाल के विरोध के कारण यह हस्ताक्षर नहीं हो सका। अब बांग्लादेश चीन की ओर झुक रहा है, जो भारत के लिए एक कूटनीतिक झटका है।
चीन का बढ़ता प्रभाव
यह प्रोजेक्ट चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का हिस्सा बन सकता है। इससे बांग्लादेश में चीन का प्रभाव बढ़ेगा और भारत के पड़ोस में उसकी रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी। भारत अब इस स्थिति पर ध्यान दे रहा है क्योंकि यह केवल जल प्रबंधन का मुद्दा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीति से भी जुड़ा है।
