बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन: शेख हसीना पर गंभीर आरोप
सियासी हलचल के बीच खालिदा जिया का निधन
नई दिल्ली: बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के निधन ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। उनकी पार्टी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर गंभीर आरोप लगाए हैं, यह कहते हुए कि उनकी मौत की जिम्मेदारी से हसीना को मुक्त नहीं किया जा सकता।
बीएनपी का कहना है कि खालिदा जिया को लंबे समय तक जेल में रखा गया, उन्हें उचित चिकित्सा नहीं मिली और विदेश में इलाज की अनुमति नहीं दी गई, जिसके कारण उनकी सेहत बिगड़ती गई और अंततः उनकी मृत्यु हो गई। इस बयान ने बांग्लादेश की राजनीति में फिर से तीखी बहस को जन्म दिया है।
अंतिम संस्कार से पहले का बयान
ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, बीएनपी के स्थायी समिति के सदस्य नजरुल इस्लाम खान ने खालिदा जिया के अंतिम संस्कार से पहले एक लिखित बयान पढ़ा। इस अवसर पर अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस, बांग्लादेशी सशस्त्र बलों के प्रमुख और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता उपस्थित थे।
नजरुल इस्लाम खान, जो खालिदा जिया के करीबी सहयोगी रहे हैं, ने इस बयान के माध्यम से सीधे शेख हसीना को कटघरे में खड़ा किया।
नजरुल इस्लाम खान का बयान
बयान में नजरुल ने कहा कि खालिदा जिया को 8 फरवरी 2018 से एक झूठे मामले में दो वर्षों से अधिक समय तक जेल में रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान उन्हें उचित चिकित्सा नहीं मिली, जिससे उनकी सेहत गंभीर रूप से बिगड़ गई।
उन्होंने कहा, "पूरे देश ने देखा कि जो नेता खुद जेल गई थीं, वह गंभीर रूप से बीमार होकर बाहर निकलीं।" नजरुल ने यह भी कहा कि चार वर्षों की नजरबंदी के दौरान उनकी हालत और खराब होती गई, क्योंकि उन्हें विदेश में इलाज कराने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा, "इसका परिणाम यह हुआ कि इस महान नेता की अंततः मृत्यु हो गई। इसलिए, फासीवादी हसीना को इस मौत की जिम्मेदारी से कभी भी मुक्त नहीं किया जा सकता।"
खालिदा जिया का अंतिम संस्कार
बेगम खालिदा जिया का अंतिम संस्कार बुधवार को किया गया। वह लंबे समय से दिल और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। ढाका के एवरकेयर अस्पताल में पिछले पांच हफ्तों से उनका इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने सुबह करीब छह बजे अंतिम सांस ली।
बांग्लादेश की राजनीति में एक युग का अंत
1945 में भारत के जलपाईगुड़ी में जन्मी खालिदा जिया ने बांग्लादेश की राजनीति में तीन दशकों से अधिक समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह 1991 से 1996 और फिर 2001 से 2006 तक देश की प्रधानमंत्री रहीं। वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला थीं।
उनके पति जनरल जिया उर रहमान स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व सैन्य शासक रह चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खालिदा जिया का निधन बांग्लादेश की राजनीति में एक युग के अंत का संकेत है और इससे बीएनपी को आगामी चुनावों में मतदाताओं की सहानुभूति मिल सकती है।
