बांग्लादेश की राजनीति में नया विवाद: राष्ट्रपति का गंभीर आरोप
बांग्लादेश में राजनीतिक हलचल
बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति एक बार फिर से गर्म हो गई है, जब राष्ट्रपति मोहम्मद शाहबुद्दीन ने पूर्व मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस पर गंभीर संवैधानिक उल्लंघन और सत्ता को अस्थिर करने के प्रयास का आरोप लगाया। राष्ट्रपति ने बांग्ला दैनिक कालेर कांथो को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि यूनुस ने अंतरिम शासन के दौरान संविधान की आवश्यकताओं की अवहेलना की। उन्होंने यह भी बताया कि यूनुस की विदेश यात्राओं के परिणामों की जानकारी उन्हें कभी नहीं दी गई, जो कि एक गंभीर प्रोटोकॉल उल्लंघन है।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि न केवल उन्हें यात्रा की जानकारी नहीं दी गई, बल्कि उनसे शिष्टाचार भेंट भी नहीं की गई। यह केवल प्रोटोकॉल का मामला नहीं था, बल्कि संविधान की गरिमा का भी प्रश्न था। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि उनके प्रस्तावित दौरे को भी रोका गया। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि 2024 के चुनावों के बाद उन्हें पद से हटाने की साजिश की गई थी, जिसमें एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश को असंवैधानिक तरीके से उनके स्थान पर बैठाने की कोशिश की गई।
22 अक्टूबर 2024 की रात को स्थिति और भी भयावह हो गई, जब बंगभवन के बाहर भीड़ ने प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति भवन को लूटने का प्रयास किया। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना को तैनात करना पड़ा। राष्ट्रपति ने कहा कि सशस्त्र बलों और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेताओं ने संवैधानिक निरंतरता का समर्थन किया।
राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया कि उनके कार्यालय को सुनियोजित तरीके से अलग थलग किया गया। ढाका रिपोर्टर्स यूनिटी के नए नेताओं से शिष्टाचार भेंट के बाद, बंगभवन के प्रेस प्रकोष्ठ को हटा दिया गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राष्ट्रपति कार्यालय साधारण प्रेस विज्ञप्ति तक जारी नहीं कर पा रहा था।
राष्ट्रपति का कहना है कि राष्ट्रीय दिवसों पर प्रकाशित सरकारी परिशिष्टों में उनकी तस्वीरें और संदेश हटा दिए गए। उन्होंने इस संबंध में विदेश मंत्रालय को लिखित आपत्ति भी दर्ज कराई।
बांग्लादेश की राजनीति अब एक नए मोड़ पर है। आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच असली सवाल यह है कि क्या देश का संवैधानिक ढांचा इस संकट से उबर पाएगा या सत्ता की यह लड़ाई और गहरी होगी।
