बांग्लादेश की राजनीति में नया विवाद: राष्ट्रपति ने पूर्व मुख्य सलाहकार पर गंभीर आरोप लगाए
बांग्लादेश में राजनीतिक हलचल
नई दिल्ली: बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति में एक नया संकट उत्पन्न हुआ है। हाल ही में नई सरकार के गठन के बाद, राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पूर्व मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राष्ट्रपति का कहना है कि यूनुस के डेढ़ साल के शासन के दौरान उन्हें बंगभवन में कैद रखा गया और संविधान का उल्लंघन किया गया।
संविधान का उल्लंघन
राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने 'कलेर कंठो' को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि यूनुस ने अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन नहीं किया। उन्होंने बताया कि मुख्य सलाहकार को विदेश यात्रा के बाद राष्ट्रपति को लिखित जानकारी देनी चाहिए थी, लेकिन यूनुस ने 14-15 बार विदेश यात्रा की और कभी भी सूचित नहीं किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें राज्य के मामलों की जानकारी नहीं दी गई और न ही विदेशी समझौतों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा, "वे मुझसे कभी नहीं मिले। मुझे पूरी तरह से अंधेरे में रखा गया।"
बंगभवन में कैद
शहाबुद्दीन ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले डेढ़ साल से उन्हें बंगभवन में बंदी बना कर रखा गया। यूनुस प्रशासन ने उनकी दो विदेश यात्राएं, कोसोवो और कतर, को भी रोक दिया। उन्होंने कहा कि 133 अध्यादेश जारी किए गए, जिनमें से कई का कोई औचित्य नहीं था और राष्ट्रपति को इन पर कोई जानकारी नहीं दी गई।
असंवैधानिक हटाने की कोशिश
राष्ट्रपति ने खुलासा किया कि यूनुस सरकार ने उन्हें असंवैधानिक तरीके से हटाने की योजना बनाई थी। एक बार पूर्व मुख्य न्यायाधीश को लाकर उनकी जगह नियुक्त करने की कोशिश की गई, लेकिन एक न्यायाधीश ने इसे संवैधानिक बाध्यताओं के कारण ठुकरा दिया।
22 अक्टूबर 2024 की रात को बंगभवन के बाहर भारी भीड़ इकट्ठा हुई और आवास लूटने की कोशिश की गई। सेना की मदद से स्थिति को नियंत्रित किया गया। राष्ट्रपति ने इसे "भयानक रात" बताया।
सेना और बीएनपी का सहयोग
शहाबुद्दीन ने कहा कि बांग्लादेश सेना के तीनों प्रमुखों और बीएनपी नेतृत्व ने संवैधानिक निरंतरता बनाए रखने में मदद की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में उनकी हार पूरे बल की हार होगी। सेना ने इसे रोकने का वादा किया।
