बांग्लादेश के राष्ट्रपति का डॉ. यूनुस पर गंभीर आरोप: क्या है मामला?
बांग्लादेश में राजनीतिक संकट जारी
बांग्लादेश: देश में राजनीतिक तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में आम चुनाव के बाद बीएनपी के नेता तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ है। इस बीच, राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पूर्व मुख्य सलाहकार डॉ. मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक मीडिया इंटरव्यू में राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में उन्हें जानबूझकर संवैधानिक प्रक्रियाओं से दूर रखा गया और राष्ट्रपति पद की गरिमा को बार-बार ठेस पहुंचाई गई।
गैरजरूरी अध्यादेशों का आरोप
राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने डॉ. यूनुस पर कई गैर-जरूरी अध्यादेश जारी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इन अध्यादेशों पर उनसे कोई औपचारिक चर्चा नहीं की गई। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि डॉ. यूनुस ने संवैधानिक परंपराओं का पालन नहीं किया और राष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई।
विदेश यात्राओं की जानकारी छिपाने का आरोप
राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया कि डॉ. यूनुस ने कम से कम 15 विदेश यात्राओं की जानकारी उन्हें नहीं दी, जबकि संवैधानिक नियमों के अनुसार मुख्य सलाहकार को राष्ट्रपति को सूचित करना अनिवार्य है। इसके अलावा, बांग्लादेश और अमेरिका के बीच हुए एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते की जानकारी भी उन्हें नहीं दी गई।
राष्ट्रपति की विदेश यात्राओं पर रोक
शहाबुद्दीन ने कहा कि डॉ. यूनुस ने उनकी दो प्रस्तावित विदेश यात्राओं पर रोक लगा दी। इनमें दिसंबर 2025 में कोसोवो की यात्रा और एक अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में शामिल होने की अनुमति शामिल है।
सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रखने का प्रयास
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अंतरिम सरकार उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रखना चाहती थी। उन्हें विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों और अन्य पारंपरिक आयोजनों में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। यहां तक कि विदेशों में स्थित बांग्लादेशी दूतावासों से उनकी तस्वीरें हटाने का भी आरोप लगाया गया।
पद से हटाने के प्रयास का आरोप
राष्ट्रपति ने सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें पद से हटाने के प्रयास हुए। उनके अनुसार, अंतरिम सरकार की एक सलाहकार ने मुख्य न्यायाधीश से संपर्क कर असंवैधानिक तरीके से राष्ट्रपति पद की शपथ लेने का अनुरोध किया, जिसे न्यायपालिका ने खारिज कर दिया।
