बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर शेख हसीना की चिंता: क्या है स्थिति?
शेख हसीना का कड़ा बयान
नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। भारत में रहकर, उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर हिंदुओं, पर हो रही हिंसा और हत्याओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है, इसे अत्यंत दुखद बताया है।
अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप
हसीना ने आरोप लगाया कि यूनुस के सत्ता में आने के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, यूनुस के शासन में हजारों अल्पसंख्यक, जिसमें ईसाई, हिंदू, बौद्ध और अहमदिया मुसलमान शामिल हैं, को लक्षित किया गया है, और इसके लिए कोई जवाबदेही नहीं है।
धार्मिक स्थलों पर हमले
हसीना ने यह भी कहा कि बांग्लादेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। मंदिरों, चर्चों और मस्जिदों को नष्ट किया जा रहा है, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को दबाया जा रहा है, और महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से हटा दिया जा रहा है।
कट्टरपंथ और भीड़ की मानसिकता
एक मीडिया इंटरव्यू में, शेख हसीना ने मौजूदा हमलों को धार्मिक कट्टरपंथ और भीड़ की मानसिकता का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार ने इन ताकतों पर नियंत्रण नहीं रखा है। दीपू दास की हत्या का उदाहरण देते हुए, उन्होंने इसे कट्टरपंथ की गहरी जड़ों का संकेत बताया।
हिंसा को वैचारिक जामा पहनाने का प्रयास
हसीना ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं को कट्टरपंथी विचारधारा के नाम पर सही ठहराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी हिंसा को केवल एक मजबूत और लोकतांत्रिक नेतृत्व के माध्यम से रोका जा सकता है, जो कट्टरपंथ को खारिज करता है और अल्पसंख्यकों को समान नागरिकता प्रदान करता है।
भारत से अपेक्षाएं
भारत की भूमिका पर चर्चा करते हुए, हसीना ने कहा कि भारत हमेशा बांग्लादेश का विश्वसनीय मित्र रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हो रही हिंसा केवल बांग्लादेश को ही नहीं, बल्कि उसके पड़ोसियों को भी प्रभावित कर रही है।
निष्पक्ष चुनाव की अपील
हसीना ने भारत से अपील की कि वह लोकतांत्रिक सिद्धांतों, अल्पसंख्यकों के अधिकारों और बांग्लादेश में निष्पक्ष चुनाव के लिए समर्थन बनाए रखे। उन्होंने कहा कि एक स्थिर और लोकतांत्रिक बांग्लादेश पूरे दक्षिण एशिया के लिए आवश्यक है।
अल्पसंख्यकों पर हमलों के आंकड़े
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के प्रवक्ता के अनुसार, दिसंबर से अब तक हिंदू समुदाय के सात सदस्यों की हत्या हो चुकी है। अगस्त 2024 में हसीना की सरकार के हटने के बाद से अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। 2022 की जनगणना के अनुसार, बांग्लादेश में लगभग 1.31 करोड़ हिंदू रहते हैं, जो कुल जनसंख्या का लगभग 7.95 प्रतिशत हैं।
