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बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा: क्या सरकार की है कोई जिम्मेदारी?

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा की घटनाएं चिंता का विषय बन गई हैं। हाल ही में हुई हत्याओं और गैंगरेप की घटनाओं ने सवाल उठाए हैं कि क्या सरकार ने इन पर कोई कार्रवाई की है। कट्टरपंथी समूहों की बढ़ती गतिविधियों के बीच, यह जानना जरूरी है कि क्या बांग्लादेश की सरकार इन घटनाओं को रोकने में सक्षम है। इस लेख में हम इन घटनाओं की विस्तृत जानकारी और सरकार की भूमिका पर चर्चा करेंगे।
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बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा: क्या सरकार की है कोई जिम्मेदारी?

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ लिंचिंग की घटनाओं में तेजी आई है। क्या मोहम्मद यूनुस की सरकार ने इस पर कोई रोक लगाने की कोशिश की है? कट्टरपंथी समूह बेखौफ होकर अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं। हाल ही में 24 घंटे के भीतर दो हिंदुओं की हत्या और एक हिंदू विधवा के साथ गैंगरेप की घटनाएं सामने आई हैं। ये घटनाएं यह सवाल उठाती हैं कि सरकार इन हिंसक वारदातों पर चुप क्यों है?


बांग्लादेश में हिंदू व्यापारी की हत्या

नरसिंगदी शहर में एक हिंदू किराना दुकानदार की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। इससे पहले, जेस्सोर जिले में एक हिंदू व्यापारी को गोली मारकर हत्या की गई थी। इस सप्ताह में यह तीसरी हत्या है, जिससे पिछले 15 दिनों में बांग्लादेश में छह हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। पुलिस के अनुसार, दुकानदार मणि चक्रवर्ती पर हमला तब हुआ जब वह दुकान बंद कर घर लौट रहे थे।


दीपपू दास की लिंचिंग का मामला

दीपपू दास की मॉब लिंचिंग की घटना ने बांग्लादेश में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। वीडियो में दिखाया गया है कि पुलिस ने कैसे उन्हें कट्टरपंथियों के हवाले कर दिया। पिछले 18 दिनों में छह हिंदुओं की हत्या हो चुकी है, जिसमें कई मामलों में कट्टरपंथी समूहों ने विभिन्न बहाने बनाकर हिंदुओं को निशाना बनाया है।


हादी की हत्या पर चार्जशीट

बांग्लादेश पुलिस ने छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में चार्जशीट दायर की है। पुलिस का कहना है कि यह हत्या राजनीतिक प्रतिशोध के कारण की गई थी। हादी ने अवामी लीग और छात्र लीग की आलोचना की थी, जिससे उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ गई थी।