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बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले: क्या है स्थिति?

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हाल की घटना में एक शिक्षक के घर को आग लगा दी गई, जिससे समुदाय में भय का माहौल है। स्थानीय लोग प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हाल के दिनों में कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं, जो अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो रहा है।
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बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले: क्या है स्थिति?

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले


नई दिल्ली: बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले लगातार जारी हैं। हालिया घटना सिलहट जिले के गोवाइनघाट क्षेत्र से आई है, जहां एक हिंदू शिक्षक के निवास को आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना ने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न की हैं।


सूत्रों के अनुसार, यह हमला रात के समय किया गया, जिसमें उपद्रवियों ने शिक्षक के घर को पूरी तरह से जलाने का प्रयास किया। हालांकि, सभी सदस्य सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन संपत्ति को भारी नुकसान हुआ है।


गोवाइनघाट में शिक्षक का घर बना निशाना

जानकारी के अनुसार, सिलहट जिले के बहोर गांव में रहने वाले हिंदू शिक्षक बिरेंद्र कुमार डे, जिन्हें स्थानीय लोग 'झुनू सर' के नाम से जानते हैं, के घर पर यह हमला हुआ। अज्ञात हमलावरों ने उनके घर में आग लगा दी, जिससे मकान और सामान को गंभीर क्षति पहुंची।


स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब बिरेंद्र कुमार डे के घर को निशाना बनाया गया है। इससे पहले भी उनके निवास पर हमले हो चुके हैं, जिससे क्षेत्र के हिंदू परिवारों में भय का माहौल बना हुआ है।


अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं

घटना के बाद, स्थानीय समुदाय ने प्रशासन से दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और बिगड़ सकती है और अल्पसंख्यक समुदाय पर हमले बढ़ सकते हैं।


हाल की गंभीर घटनाएं

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हाल के दिनों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय से जुड़ी कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। 11 जनवरी को फेनी जिले के डागनभुइयां में 28 वर्षीय समीर कुमार दास की हत्या कर दी गई थी। उनका शव खून से लथपथ मिला, जबकि उनकी CNG ऑटोरिक्शा गायब थी। पुलिस का मानना है कि यह हत्या लूट के इरादे से की गई थी।


इसके अगले दिन, 12 जनवरी को अवामी लीग से जुड़े संगीतकार प्रोलय चाकी की जेल में मौत की खबर आई। परिजनों का आरोप है कि उन्हें समय पर चिकित्सा नहीं मिली और हिरासत में उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।


अल्पसंख्यक समुदाय की चिंता

इन घटनाओं ने बांग्लादेश के हिंदू समुदाय में गहरी चिंता पैदा कर दी है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हमले, हत्याएं और हिरासत में लापरवाही जैसे मामले यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या देश में अल्पसंख्यकों को पर्याप्त सुरक्षा मिल रही है।


स्थानीय हिंदू परिवारों का कहना है कि कमजोर कार्रवाई और मामलों का लंबित रहना अपराधियों के हौसले को बढ़ाता है, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय और अधिक असुरक्षित महसूस कर रहा है।