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बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की बढ़ती लहर: क्या है असुरक्षा का कारण?

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की एक नई लहर सामने आई है, जिसमें हाल ही में दो व्यक्तियों की हत्या हुई है। इन घटनाओं ने देश में सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा दिया है और हिंदू समुदाय में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। जानें इन हमलों के पीछे के कारण और भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता के बारे में।
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बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की बढ़ती लहर: क्या है असुरक्षा का कारण?

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमलों की नई घटनाएं


नई दिल्ली: बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 24 घंटों में दो अलग-अलग घटनाओं में दो हिंदू व्यक्तियों की हत्या कर दी गई, जिससे देश में सांप्रदायिक तनाव और बढ़ गया है। हिंदू समुदाय के लोग अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।


हिंदू दुकानदार की निर्मम हत्या

नरसिंगड़ी जिले के पलाश क्षेत्र में चोरसिंदूर बाजार में एक किराना दुकान चलाने वाले 40 वर्षीय शरत चक्रवर्ती मणि (मोनी चक्रवर्ती) पर अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियारों से हमला किया। यह घटना 5 जनवरी की रात लगभग 10 बजे हुई। गंभीर रूप से घायल मणि को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।


गवाहों के अनुसार, यह हमला अचानक हुआ और हमलावर मौके से फरार हो गए। ढाका के निकट होने के कारण यह घटना और भी चिंताजनक बन गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह हमला केवल इसलिए हुआ क्योंकि पीड़ित हिंदू था।


जशोर में कारोबारी और पत्रकार की हत्या

इसी दिन शाम करीब 6 बजे जशोर जिले के मणिरामपुर क्षेत्र के कोपालिया बाजार में 38-45 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी की हत्या कर दी गई। राणा एक आइस फैक्ट्री के मालिक और एक स्थानीय अखबार के कार्यकारी संपादक थे।


कुछ मोटरसाइकिल सवार लोग आए, उन्हें फैक्ट्री से बाहर बुलाया और एक गली में ले जाकर उनके सिर में गोलियां चलाईं। पुलिस को मौके से खाली कारतूस मिले हैं। कुछ रिपोर्टों में इसे व्यक्तिगत या आपराधिक कारण बताया गया है, लेकिन समुदाय इसे लक्षित हमला मान रहा है।


पिछले 18 दिनों में छठी लक्षित घटना

ये दोनों हत्याएं पिछले 18 दिनों में हिंदू समुदाय पर हुई छठी लक्षित वारदात हैं। इससे पहले:



  • 18 दिसंबर को मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या की।

  • 24 दिसंबर को राजबारी में अमृत मंडल की हत्या की गई।

  • 29-30 दिसंबर को बजेंद्र बिस्वास को गोली मारी गई।

  • 31 दिसंबर को शरियतपुर में खोकन चंद्र दास पर हमला हुआ, जिनकी 3 जनवरी को मौत हो गई।


हिंदू संगठनों का कहना है कि दिसंबर में कई हमले हुए हैं और कट्टरपंथी ताकतें अल्पसंख्यकों को डराने का प्रयास कर रही हैं।


बढ़ता तनाव और अंतरराष्ट्रीय चिंता

ये घटनाएं दिसंबर 2025 में एक कट्टरपंथी नेता की मौत के बाद शुरू हुई हिंसा से जुड़ी बताई जा रही हैं। अंतरिम सरकार पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा न करने के आरोप लग रहे हैं। भारत ने इन हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मानवाधिकार संगठनों ने भी कानून-व्यवस्था की गिरावट की आलोचना की है। हिंदू समुदाय में डर का माहौल है और लोग सुरक्षित भविष्य की मांग कर रहे हैं।