बोलिविया में सरकार विरोधी प्रदर्शन: राष्ट्रपति पाज के इस्तीफे की मांग
बोलिविया की राजनीतिक स्थिति
बोलिविया, जो दक्षिण अमेरिका में स्थित एक लैंड लॉक्ड राष्ट्र है, की सीमाएं पेरू, अर्जेंटीना, चिली, पैराग्वे और ब्राजील से मिलती हैं। वर्तमान में, यह देश गंभीर विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रहा है, जो इसे टूटने के कगार पर ले जा रहे हैं। पिछले एक महीने से, सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं, जिसमें अब तक सात लोगों की जान जा चुकी है और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई हैं।
विरोध का कारण
देश का अधिकांश हिस्सा ठप हो चुका है, और प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम कर दिया है। इस स्थिति के कारण खाद्य संकट उत्पन्न हो गया है। छह महीने पहले, रोड्रिगो पाज ने राष्ट्रपति पद संभाला था, जब देश पहले से ही आर्थिक संकट में था। उनके अमेरिकी समर्थक होने की उम्मीद थी कि स्थिति में सुधार होगा, लेकिन सरकार द्वारा उठाए गए कड़े कदमों के कारण विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
पद से इस्तीफे की मांग
अब प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति पाज के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, लेकिन पाज ने कहा है कि वह झुकने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो भी देश को नुकसान पहुंचाना चाहता है, उसे संविधान की पूरी ताकत से सामना करना होगा।
विरोध प्रदर्शन की शुरुआत
विरोध की शुरुआत इस वर्ष अप्रैल में नए भूमि सुधार कानून के लागू होने से हुई। इस कानून के तहत, किसान अपनी इच्छा से छोटी जोत को मध्यम जोत में बदल सकते हैं, जिससे उन्हें बैंक से लोन लेने की सुविधा मिलती है। हालांकि, किसानों और आदिवासियों ने इसका विरोध किया, क्योंकि इससे उनकी जमीन का कानूनी संरक्षण समाप्त हो जाएगा।
सरकार की प्रतिक्रिया
सरकार ने आश्वासन दिया कि भूमि की श्रेणी इच्छानुसार बदली जाएगी, लेकिन किसान संगठनों ने प्रमुख मार्गों को बंद कर दिया। अंततः, सरकार ने भूमि सुधार कानून को वापस ले लिया, लेकिन अन्य संगठनों ने भी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिए।
सुलह की कोशिशें
सरकार ने भूमि सुधार कानून को रद्द कर दिया और खराब वाहनों के लिए मुआवजे की घोषणा की। शिक्षकों को बोनस देने का भी प्रस्ताव रखा गया, लेकिन आदिवासी समुदाय ने सड़कों को जाम कर दिया और राष्ट्रपति के इस्तीफे पर अड़े रहे।
आदिवासियों की नाराजगी
बोलिविया के प्रमुख शहरों, ला पाज और एल ऑल्टो, की सड़कें बंद हैं, जिससे खाद्य सामग्री की कमी हो गई है। सार्वजनिक परिवहन प्रभावित हुआ है और स्कूलों को बंद करना पड़ा है। आदिवासियों की नाराजगी का एक कारण यह है कि उन्हें सरकार में शामिल नहीं किया गया, जबकि पिछले दो दशकों में उनकी भागीदारी थी।
विश्वासघात का आरोप
लोगों का आरोप है कि रोड्रिगो पाज ने चुनाव में अलग मुद्दों के आधार पर जीत हासिल की, लेकिन राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी नीतियां पूरी तरह से बदल गईं। जनता इसे विश्वासघात मान रही है और पाज पर देश को गिरवी रखने का आरोप लगा रही है।
