ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर ने ट्रंप को दिया स्पष्ट संदेश: ईरान युद्ध में नहीं पड़ेगा ब्रिटेन
ब्रिटेन का स्पष्ट रुख
नई दिल्ली: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को स्पष्ट रूप से बताया है कि उनका देश ईरान से जुड़े संघर्ष में शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा, "यह हमारी लड़ाई नहीं है।" इसके साथ ही, उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की शुरुआत की घोषणा की।
ट्रंप के दबाव का जवाब
हाल ही में, ट्रंप ने नाटो सहयोगियों पर दबाव डालते हुए कहा था कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद नहीं की गई, तो नाटो का भविष्य "बहुत बुरा" हो सकता है। इस पर, स्टारमर ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि वे केवल ब्रिटेन के राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लेंगे, चाहे कोई भी दबाव हो।
स्टारमर ने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रिटेन ईरान के साथ चल रहे युद्ध में नहीं फंसेगा, लेकिन वे समुद्री सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए काम करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेज़बानी
प्रधानमंत्री स्टारमर ने यह भी बताया कि ब्रिटेन इस सप्ताह एक अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमैटिक सम्मेलन का आयोजन करेगा। इसका उद्देश्य ईरान द्वारा अवरुद्ध होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के उपाय खोजना है, जो विश्व के तेल परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है।
इस जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है और व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। स्टारमर ने बताया कि 35 देशों ने समुद्री सुरक्षा बहाल करने के लिए एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए हैं।
विदेश सचिव यवेट कोपर इस सम्मेलन का नेतृत्व करेंगी, जबकि सैन्य योजनाकार युद्ध के बाद की सुरक्षा व्यवस्था पर काम कर रहे हैं। स्टारमर ने कहा कि स्थिरता लाने के लिए सैन्य शक्ति और कूटनीतिक प्रयासों का एक संयुक्त मोर्चा आवश्यक है।
ब्रिटेन की सुरक्षा रणनीति
स्टारमर ने जोर देकर कहा कि ब्रिटेन अपने नागरिकों, हितों और क्षेत्रीय सहयोगियों की रक्षा करेगा, लेकिन बड़े युद्ध में शामिल नहीं होगा। उन्होंने नाटो मिशन के रूप में इस मुद्दे को नहीं देखने की बात कही और खाड़ी देशों तथा यूरोपीय साझेदारों के साथ एक व्यापक गठबंधन बनाने पर जोर दिया।
यह घटनाक्रम ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया है, जिसमें होर्मुज का मुद्दा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा चिंता का विषय बन गया है। ब्रिटेन का यह रुख दर्शाता है कि वह कूटनीति और सहयोग पर अधिक भरोसा कर रहा है।
