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ब्रिटेन और अमेरिका के बीच ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर बढ़ते मतभेद

ब्रिटेन और अमेरिका के बीच ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। ब्रिटिश सरकार ने अमेरिका के अनुरोध को ठुकराते हुए अपने हवाई अड्डों का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी। इस निर्णय ने दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित किया है और चागोस द्वीप समूह पर चल रही वार्ताओं पर भी असर डाला है। जानें इस स्थिति के पीछे की वजहें और अमेरिका की प्रतिक्रिया।
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ब्रिटेन और अमेरिका के बीच ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर बढ़ते मतभेद

ब्रिटेन का सैन्य सहयोग से इनकार


नई दिल्ली: ब्रिटेन और अमेरिका के बीच ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। ब्रिटिश सरकार ने अमेरिकी अनुरोध को अस्वीकार करते हुए अपने हवाई अड्डों का उपयोग हमलों के लिए करने की अनुमति देने से मना कर दिया है। इस निर्णय ने न केवल दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है, बल्कि चागोस द्वीप समूह पर चल रही संवेदनशील वार्ताओं पर भी असर डाला है।


कीर स्टारमर की सरकार का रुख

कीर स्टारमर की सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान पर किसी पूर्व-निर्धारित हमले में सीधे शामिल नहीं होगी। अमेरिका ने स्विंडन के पास स्थित आरएएफ फेयरफोर्ड से लंबी दूरी के बमवर्षक विमानों के संचालन की अनुमति मांगी थी, लेकिन लंदन ने इसे मंजूरी नहीं दी। ब्रिटेन का कहना है कि यदि हमले पहले से तय हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में नहीं आते, तो उसमें सहयोग करना नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।


ब्रिटेन की पुरानी नीति

ब्रिटेन का स्पष्ट इनकार


ब्रिटिश सरकार का यह रुख उसकी पुरानी नीति से जुड़ा हुआ है। 2001 के बाद से, ब्रिटेन ने यह सिद्धांत अपनाया है कि यदि कोई देश अपने सहयोगी की गैरकानूनी सैन्य कार्रवाई में मदद करता है, तो वह भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसी कारण से, ब्रिटेन ने ईरानी ठिकानों पर अमेरिकी हमलों में सीधी भागीदारी से दूरी बनाई है।


अमेरिका की प्रतिक्रिया

अमेरिका की बढ़ती सक्रियता


वाशिंगटन ने हाल के दिनों में मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी को बढ़ाया है। डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन के निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को संभावित खतरों से निपटने के लिए आवश्यक सैन्य ठिकानों तक पहुंच की आवश्यकता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि एक अस्थिर और खतरनाक शासन से संभावित हमले को रोकने के लिए अमेरिका को जरूरी कदम उठाने होंगे।


चागोस द्वीप समूह पर चिंता

चागोस द्वीप समझौता और नई चिंता


हाल के महीनों में, ब्रिटेन चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने की योजना पर काम कर रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को 99 साल के लिए भारी रकम पर वापस पट्टे पर लिया जाएगा। अमेरिका इस अड्डे को हिंद-प्रशांत और मध्य पूर्व में अपने अभियानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है। ट्रंप ने इस समझौते पर भी सवाल उठाए हैं। कभी उन्होंने इसका समर्थन किया, तो कभी इसे बड़ी गलती बताया। हाल ही में, उन्होंने ब्रिटेन से आग्रह किया कि वह इस सौदे को आगे न बढ़ाए और डिएगो गार्सिया को न छोड़े।