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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: अंतिम चरण में, जल्द हो सकता है ऐतिहासिक समझौता

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि दोनों देश इस समझौते को लेकर उत्साहित हैं और इसे जल्द पूरा करने की उम्मीद है। सर्जियो गोर ने भी बताया कि समझौता लगभग 99 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इस लेख में जानें कि कैसे भारत की भूमिका चीन पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका का क्या रुख है।
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: अंतिम चरण में, जल्द हो सकता है ऐतिहासिक समझौता

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की प्रगति


नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने जानकारी दी है कि दोनों देशों के बीच इस समझौते को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है और अगले कुछ हफ्तों में इसे पूरा करने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष इस समझौते को लेकर उत्साहित हैं और इसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जा सकता है।


भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं के अलावा, क्वाड सहयोग, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और क्षेत्रीय कूटनीति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई है, जिसमें भारत एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के समक्ष 2027 वित्तीय वर्ष के बजट पर चर्चा के दौरान भारत का कई बार उल्लेख किया गया, जो अमेरिका की विदेश नीति में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।


व्यापार समझौते पर सहमति की संभावना

मार्को रूबियो ने हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के समक्ष कहा कि वाशिंगटन और नई दिल्ली द्विपक्षीय व्यापार समझौते के बेहद करीब हैं। उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि हम अपने व्यापार समझौते पर बातचीत को जल्द पूरा कर लेंगे। संभवतः यह कुछ हफ्तों में पूरा हो जाएगा। दोनों पक्ष इसे लेकर उत्साहित हैं।"


क्वाड सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर ध्यान

रूबियो ने क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों के साथ हुई चर्चाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के अंत तक क्वाड नेताओं की एक और बैठक होने की संभावना है। इसके साथ ही उन्होंने समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में चार देशों के बीच बढ़ते सहयोग की जानकारी भी साझा की।


भारत की भूमिका: चीन पर निर्भरता कम करना

अमेरिकी विदेश मंत्री ने चीन पर निर्भरता कम करने के प्रयासों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और रणनीतिक क्षेत्रों में भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभर रहा है।


ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका का सख्त रुख

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि ईरान का परमाणु हथियार हासिल करना अमेरिका के लिए एक "लक्ष्मण रेखा" है। यह बयान उस समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव को समाप्त करने के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच गतिरोध बना हुआ है।


मुंबई में आयोजित 'सिटी 2026 इंडिया कांफ्रेंस' में एक सवाल के जवाब में गोर ने कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू किए जाने के बाद इस्लामिक गणराज्य ने अपने पड़ोसी देशों के साथ-साथ कतर, सऊदी अरब और ओमान जैसे खाड़ी देशों पर भी हमले किए।


सर्जियो गोर का बयान: समझौता लगभग पूरा

सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह समझौता लगभग अंतिम चरण में है और अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।


उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता करीब है। यह लगभग 99 प्रतिशत पूरा हो चुका है और केवल एक प्रतिशत काम बाकी है। दोनों देश शेष एक प्रतिशत लंबित मुद्दों को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।