भारत-अमेरिका संबंधों में बढ़ता तनाव: नया कानून बन सकता है चुनौती
भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव
भारत और अमेरिका के बीच संबंध वर्तमान में एक नाजुक मोड़ पर हैं, जहां तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के खिलाफ की गई तीखी टिप्पणियों और टैरिफ बढ़ाने की धमकियों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अब यह मामला अमेरिकी संसद तक पहुंच चुका है। दरअसल, अमेरिकी सीनेट में एक ऐसा विधेयक पेश होने वाला है, जो भारत के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है। यह विधेयक रूस पर प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार किया गया है, जिसे अमेरिकी सीनेट के दो सदस्यों, लिंसे ग्राहम और रिचर्ड लुमथन ने मिलकर तैयार किया है। व्हाइट हाउस ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य रूस की आर्थिक गतिविधियों को कमजोर करना है, लेकिन इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है।
500 प्रतिशत टैरिफ का खतरा
यूक्रेन युद्ध के आरंभ के बाद से भारत ने रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद में तेजी लाई है। लेकिन अब अमेरिका इस स्थिति को सहन करने के मूड में नहीं है। नए विधेयक में एक गंभीर प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके अनुसार यदि रूस शांति वार्ता के लिए सहमत नहीं होता है, तो रूस से तेल, गैस या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर अमेरिका 500% तक का टैरिफ लगा सकता है। भारत पहले से ही रूसी तेल पर अतिरिक्त टैरिफ का सामना कर रहा है।
चीन के प्रति ट्रंप का नरम रुख
हालांकि अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से व्यापारिक तनाव चल रहा है, फिर भी ट्रंप प्रशासन ने चीन के साथ सावधानी से व्यवहार किया है। इसका मुख्य कारण चीन का दुर्लभ खनिजों, इलेक्ट्रिक वाहनों के घटकों, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरणों और नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में प्रभुत्व है। जबकि चीन रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, अमेरिका ने उस पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाए हैं। इसके विपरीत, ट्रंप ने 12 अगस्त को चीनी आयात पर नए शुल्क को स्थगित कर दिया।
भारत की स्थिति
भारत के पास चीन जैसी रणनीतिक ताकत नहीं है। यूक्रेन युद्ध के बाद से, नई दिल्ली ने रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदा है, लेकिन उसकी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर चीन जैसा दबदबा नहीं है। ट्रंप ने भारत की व्यापार नीतियों पर असंतोष व्यक्त किया है और नई दिल्ली पर अमेरिकी वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाने का आरोप लगाया है। यह शुल्क भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के कारण लगाए गए हैं, जिसे अमेरिका रूस की अर्थव्यवस्था को समर्थन देने वाला मानता है।
