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भारत और ईरान के बीच तेल व्यापार की नई शुरुआत

भारत और ईरान के बीच लगभग पांच साल बाद तेल व्यापार फिर से शुरू हो गया है। एक जहाज जो ईरान से 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर आ रहा है, गुजरात के वाडिनार बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। यह डील वैश्विक ऊर्जा संकट और अमेरिका द्वारा दी गई अस्थाई छूट के बीच महत्वपूर्ण है। जानें इस व्यापार के पीछे की कहानी और भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए उठाए गए कदम।
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भारत और ईरान के बीच तेल व्यापार की नई शुरुआत

भारत और ईरान के बीच तेल व्यापार का पुनरारंभ

करीब पांच साल के अंतराल के बाद, भारत और ईरान के बीच तेल व्यापार फिर से शुरू हो गया है। 2019 के बाद पहली बार, एक जहाज जो ईरान से कच्चा तेल लेकर आ रहा है, गुजरात के वाडिनार बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। यह जहाज लगभग 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर आ रहा है। यह डील ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है और सप्लाई को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। ईरान-इजराइल संघर्ष और होर्मूज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच भारत का ईरान से तेल आयात एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


हाल ही में अमेरिका ने समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की खरीद पर 30 दिनों की अस्थाई छूट दी है। इसी छूट का लाभ उठाते हुए यह कार्गो भारत भेजा गया है। यह छूट वैश्विक बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए दी गई है। जानकारी के अनुसार, यह तेल ईरान के खार गार्लैंड से मार्च की शुरुआत में रवाना हुआ था और 4 अप्रैल के आसपास गुजरात पहुंचने की उम्मीद है.


बाडिनार बंदरगाह का महत्व

यह तेल वाडिनार बंदरगाह पर पहुंचेगा, जो भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां कई बड़ी रिफाइनरियां स्थित हैं, जिनमें नायरा एनर्जी की रिफाइनरी भी शामिल है, जो रूस की कंपनी रजनेफ के सहयोग से संचालित होती है। इसके अलावा, यह पोर्ट भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी कंपनियों के लिए भी एक प्रमुख सप्लाई केंद्र है।


भारत कभी ईरान के तेल का एक बड़ा खरीदार था, और एक समय ऐसा था जब ईरान का भारत के कुल तेल आयात में 11% से अधिक हिस्सा था। ईरानी तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए उपयुक्त माना जाता था और इसकी कीमतें भी अक्सर अनुकूल रहती थीं। लेकिन 2018 में अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बाद, भारत को मई 2019 से ईरान से तेल खरीदना बंद करना पड़ा। इसके बाद, भारत ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्य पूर्व, अमेरिका और रूस के सप्लायर्स की ओर रुख किया।


चुनौतियाँ और भविष्य की संभावनाएँ

हालांकि, वर्तमान में भारत कई देशों से तेल आयात कर रहा है, जिसमें रूस से भारी मात्रा में तेल शामिल है। ईरान के संदर्भ में, ईरान-इजराइल संघर्ष और होर्मूज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया है। कई देशों में ऊर्जा संकट की स्थिति देखी जा रही है, और इसी कारण अमेरिका ने ईरानी प्रतिबंधों में कुछ समय के लिए छूट दी है।


इस महीने की शुरुआत में, अमेरिका ने ईरानी तेल की समुद्री खरीद पर 30 दिनों के लिए छूट दी थी ताकि वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। अनुमान है कि इस समय समुद्र में लगभग 95 मिलियन बैरल ईरानी तेल मौजूद है, जिसमें से लगभग 51 मिलियन बैरल भारत के लिए उपयुक्त हो सकता है। हालांकि, भुगतान की समस्या अभी भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि ईरान अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली स्विफ्ट से बाहर है। पहले ईरान को यूरो में भुगतान किया जाता था, लेकिन अब यह व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह केवल एक बार की डील है या भारत और ईरान के बीच तेल व्यापार आगे भी जारी रहेगा। लेकिन यह स्पष्ट है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी विकल्पों को खुला रखे हुए है।