भारत और यूक्रेन के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक साइप्रस में
भारत-यूक्रेन संबंधों पर चर्चा
एक महत्वपूर्ण राजनयिक घटना के तहत, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने बुधवार को साइप्रस में मुलाकात की। यह बैठक यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक, जिसे 'जिम्निच फोरम' कहा जाता है, के दौरान हुई। दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन संघर्ष, युद्धक्षेत्र की ताजा स्थिति और दीर्घकालिक शांति के उपायों पर गहन चर्चा की। इसके साथ ही, जयशंकर ने पश्चिम एशिया के संकट पर सऊदी अरब और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं के साथ भी उच्च स्तरीय वार्ता की।
बैठक के मुख्य बिंदु
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर इस वार्ता को 'उपयोगी बैठक' बताया और कहा कि दोनों पक्षों ने यूक्रेन संघर्ष और द्विपक्षीय सहयोग पर विचार-विमर्श किया। सिबिहा ने इसे 'सार्थक बैठक' करार दिया, जिसमें रूस-यूक्रेन युद्ध और यूक्रेन की बढ़ती रणनीतिक स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने कहा कि रूस की 'आतंक के माध्यम से डराने' की कोशिशों के बावजूद, यूक्रेन मजबूत बना हुआ है।
शांति प्रयासों पर जोर
यूक्रेनी विदेश मंत्री ने कहा, 'हमारा संदेश स्पष्ट है: हम इस युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं और स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।' दोनों नेताओं ने शांति प्रयासों और वैश्विक स्तर पर मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर भी विचार किया। सिबिहा ने भारत की भूमिका की सराहना की और कहा कि जब यूरोप अपनी जिम्मेदारियों को बढ़ा रहा है, तब भारत की आवाज महत्वपूर्ण है।
भारत की कूटनीतिक भूमिका
भारत ने हमेशा यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन किया है, और उसने रूस और यूक्रेन दोनों के साथ अपने संबंधों को बनाए रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार कहा है कि 'यह युद्ध का युग नहीं है' और उन्होंने शांति प्रयासों में भारत के समर्थन की पेशकश की है। इसके अलावा, जयशंकर ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद से भी मुलाकात की और पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की।
जिम्निच फोरम की भूमिका
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साइप्रस में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में भाग लिया। जिम्निच बैठकें प्रमुख भू-आर्थिक चुनौतियों, सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए आयोजित की जाती हैं।
