भारत और वियतनाम के बीच नई साझेदारी की दिशा में कदम
भारत-वियतनाम संबंधों की नई दिशा
वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने भारत और वियतनाम के रिश्तों को एक नई दिशा देते हुए दोनों देशों को 'प्राकृतिक साझेदार' के रूप में वर्णित किया है। दिल्ली में इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (ICWA) के एक विशेष कार्यक्रम में उन्होंने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। तो लाम ने स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य और बढ़ती भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत और वियतनाम का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार, दोनों देशों को मिलकर शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना चाहिए।
वैश्विक चुनौतियों का सामना
अपने संबोधन में राष्ट्रपति तो लाम ने वैश्विक चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत और वियतनाम एक ऐसी क्षेत्रीय व्यवस्था के समर्थक हैं जो सभी के लिए समान और निष्पक्ष हो। उन्होंने भारत को वियतनाम का सबसे विश्वसनीय साथी बताया।
साझेदारी को मजबूत करने की आवश्यकता
तो लाम ने कहा कि वर्तमान समय में दोनों देशों को अपनी रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि यह मित्रता केवल दोनों देशों के लाभ के लिए नहीं है, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियमों पर आधारित व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।
व्यापार और प्रौद्योगिकी में सहयोग
राष्ट्रपति तो लाम ने बताया कि भारत और वियतनाम के बीच बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग की कई संभावनाएं हैं। विशेष रूप से फार्मा, आईटी और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ाने पर जोर दिया गया। उन्होंने भारतीय कंपनियों को वियतनाम में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों तक पहुंच आसान हो सके।
लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा
तो लाम ने दोनों देशों के नागरिकों के बीच संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष लगभग 10 लाख लोग दोनों देशों के बीच यात्रा कर चुके हैं। शिक्षा, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देकर इन संबंधों को और गहरा किया जा सकता है, विशेषकर युवाओं के बीच।
भविष्य की संभावनाएं
राष्ट्रपति तो लाम ने भारत को वियतनाम का विश्वसनीय साथी बताया और विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में यह संबंध और भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर एक नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राष्ट्रपति 5 से 7 मई तक भारत के दौरे पर हैं, जहां वे द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं।
