भारत का ईरान संकट पर संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट संदेश
भारत का कड़ा बयान
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव, विशेषकर ईरान से संबंधित हालात पर एक स्पष्ट और मजबूत संदेश दिया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने चिंता व्यक्त करते हुए संतुलित लेकिन दृढ़ बयान दिया। उन्होंने कहा कि 28 फरवरी 2026 से ईरान और खाड़ी क्षेत्र में शुरू हुए संघर्ष के बाद से भारत लगातार चिंतित है। भारत ने सभी देशों से संयम बरतने की अपील की है, ताकि स्थिति और न बिगड़े और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
संघर्ष में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा
पी हरीश ने कहा कि भारत के लिए ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है। उन्होंने इस संघर्ष में वाणिज्यिक जहाजों को सैन्य हमलों का लक्ष्य बनाए जाने की कड़ी निंदा की।
बातचीत और कूटनीति की आवश्यकता
भारत ने जोर देकर कहा कि इस समय टकराव बढ़ाने के बजाय बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाना आवश्यक है। सभी देशों को मिलकर तनाव कम करने और वास्तविक समस्याओं का समाधान निकालने के लिए काम करना चाहिए। साथ ही, हर देश की संप्रभुता और सीमाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
व्यापारिक जहाजों पर हमले की निंदा
भारत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि संघर्ष के दौरान व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में भारतीय नागरिकों की भी जान गई, जो अत्यंत दुखद है। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि व्यापारिक जहाजों पर हमला करना पूरी तरह गलत है और निर्दोष क्रू मेंबर्स की जान को खतरे में डालना स्वीकार्य नहीं है।
संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों की मौत
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस संघर्ष के दौरान क्षेत्र में विभिन्न घटनाओं में आठ भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है और एक अब भी लापता है। इस संघर्ष के कारण फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी एवं अरब सागर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण तेल मार्ग बाधित हो गया है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की टिप्पणी
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के बाधित होने से दुनिया के सबसे गरीब और कमजोर देशों पर इसका गहरा असर पड़ता है।
