भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: चीन का समर्थन और वैश्विक स्थिरता की उम्मीदें
भारत इस वर्ष ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा, जिसमें चीन का समर्थन और वैश्विक स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे। चीनी विदेश मंत्रालय के विशेष दूत ने भारत की अध्यक्षता की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि यह सम्मेलन मध्य पूर्व के तनाव को कम करने में सहायक होगा। भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि डिजिटल तकनीक और ग्रीन एनर्जी पर भी ध्यान केंद्रित करना है। ब्रिक्स का विस्तार 11 देशों तक हो चुका है, जिससे इसकी वैश्विक ताकत में वृद्धि हुई है।
| Apr 27, 2026, 13:16 IST
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी
इस वर्ष होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की जिम्मेदारी भारत के पास है। वैश्विक तनाव के बीच, इस बार के ब्रिक्स पर कई देशों की नजरें टिकी हुई हैं। इसी संदर्भ में, चीन ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है, जो इस आयोजन की प्रासंगिकता को और बढ़ाता है। दरअसल, चीनी विदेश मंत्रालय के विशेष दूत ने हाल ही में नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का सम्मान करता है और भारत की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना करता है। इसके साथ ही, चीन ने आशा व्यक्त की है कि भारत के नेतृत्व में ब्रिक्स देश मध्य पूर्व के तनाव को कम करने और वैश्विक शांति के लिए एक मजबूत संदेश देंगे। चीन का मानना है कि भारत और चीन जैसे बड़े विकासशील देशों का सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
चीन और भारत के बीच सहयोग
चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक प्रेस रिलीज के अनुसार, 23 अप्रैल 2026 को मध्य पूर्व मुद्दे पर चीनी सरकार के विशेष दूत झाई जून ने नई दिल्ली में भारत की विदेश मंत्रालय की सचिव नीना मल्होत्रा से मुलाकात की। इस दौरान, दोनों पक्षों ने ब्रिक्स तंत्र के तहत सहयोग को मजबूत करने पर विचारों का आदान-प्रदान किया। भारत में चीन के राजदूत ज फहोंग भी इस बैठक में शामिल हुए। झाई जून ने कहा कि प्रमुख विकासशील देशों के रूप में, चीन और भारत ने हमेशा महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर संवाद बनाए रखा है। चीन भारत की ब्रिक्स की रोटेटिंग प्रेसिडेंसी की भूमिका को महत्व देता है और उम्मीद करता है कि यह बैठक क्षेत्रीय स्थिति पर एक मजबूत आवाज उठाएगी। वहीं, नीना मल्होत्रा ने कहा कि भारत ब्रिक्स तंत्र में चीन की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देता है और इस तंत्र के तहत गतिविधियों की मेज़बानी में चीन के समर्थन की सराहना करता है।
भारत का लक्ष्य और ब्रिक्स का विस्तार
भारत क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए चीन सहित अन्य ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर है। भारत 2026 में ब्रिक्स का मेज़बान है और इस बार की थीम 'रिलायंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी' रखी गई है। भारत का उद्देश्य केवल आर्थिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि डिजिटल तकनीक, ग्रीन एनर्जी और विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से प्रस्तुत करना है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ब्रिक्स अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रह गया है, बल्कि 2026 तक यह 11 शक्तिशाली देशों का एक समूह बन चुका है। इसमें संस्थापक सदस्य ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं, जबकि नए सदस्य सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान, मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया हैं। इन देशों के पास बड़ी जनसंख्या, विशाल बाजार और तेल व गैस के असीमित संसाधन हैं। ब्रिक्स की बढ़ती ताकत अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय बन गई है। इसके पीछे के कुछ प्रमुख कारणों में डीडोलराइजेशन शामिल है। ब्रिक्स देश अब अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने पर जोर दे रहे हैं, जिससे डॉलर का दबदबा कम हो सकता है। अमेरिका को यह चिंता है कि भारत और चीन इस मंच का उपयोग अपनी ताकत बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। कुल मिलाकर, जहां पश्चिमी देशों में पहले से ही ब्रिक्स का विरोध हो रहा है, वहीं 2026 भारत के लिए एक सुनहरा अवसर है। जहां एक ओर चीन के साथ मिलकर क्षेत्रीय शांति पर चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर भारत को अमेरिका और रूस-चीन के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।
