भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नौसेना ने उठाए महत्वपूर्ण कदम
भारत की नौसेना की सक्रियता
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की अस्थिरता के बीच, भारतीय नौसेना ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना के कई युद्धपोत फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में तैनात हैं, जो भारत की ओर आने वाले व्यापारिक जहाजों, विशेषकर एलपीजी टैंकरों की सुरक्षा और सहायता के लिए तैयार हैं। यह कदम ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब क्षेत्रीय हमलों और ब्लॉकेज के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
एलपीजी की आवश्यकता और होर्मुज जलडमरूमध्य
भारत, जो अपनी अधिकांश एलपीजी आवश्यकता कतर और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों से पूरी करता है, घरेलू रसोई गैस की कमी का सामना कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस का प्रमुख गलियारा है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा ऊर्जा गुजरता है। शनिवार को ईरानी अधिकारियों ने दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकरों शिवालिक और नंदा देवी को होर्मुज से सुरक्षित पारगमन की अनुमति दी, जो कतर के रास लफ्फान से लोड होकर भारत आ रहे थे.
ईरान की विशेष अनुमति
ईरान की दुर्लभ छूट और सुरक्षित पारगमन
ईरान द्वारा दी गई इस दुर्लभ अपवाद के तहत दोनों टैंकरों को ब्लॉकेज के बावजूद सुरक्षित पारगमन मिला, जिसके पीछे भारत-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत मानी जा रही है। शिवालिक टैंकर, जो भारतीय जहाजरानी निगम का है, ने शुक्रवार रात होर्मुज पार किया और अब ओमान की खाड़ी में है। पोत यातायात निगरानी साइट्स के अनुसार, यह 21 मार्च तक अपने गंतव्य तक पहुंच सकता है। इस जहाज पर 40,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी लदी है। नंदा देवी भी इसी क्रम में पार हो चुका है या जल्द ही भारत पहुंचने की उम्मीद है.
भारतीय नौसेना की तैनाती
भारतीय नौसेना का एस्कॉर्ट और ऑपरेशन संकल्प
सूत्रों के मुताबिक, इन टैंकरों को भारतीय नौसेना के युद्धपोतों ने एस्कॉर्ट किया, जिससे उनकी सुरक्षित निकासी सुनिश्चित हुई। यह तैनाती ऑपरेशन संकल्प के अंतर्गत की गई है, जो क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और वाणिज्यिक जहाजों की सहायता के लिए चलाया जा रहा है। रविवार को सूत्रों ने पुष्टि की कि युद्धपोत किसी भी आपात स्थिति में व्यापारिक जहाजों को सहायता देने के लिए अलर्ट पर हैं.
ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में प्रयास
ऊर्जा सुरक्षा और आगे की कोशिशें
यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों की रसोई गैस जरूरतों को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संकेत है। सरकार अन्य फंसे जहाजों के लिए भी ईरान के साथ बातचीत जारी रखे हुए है, ताकि और एलपीजी तथा तेल की खेपें सुरक्षित रूप से भारत पहुंच सकें। दोनों टैंकरों से कुल मिलाकर करीब 92,000 मीट्रिक टन एलपीजी भारत पहुंचने वाली है, जो घरेलू संकट को कम करने में अहम भूमिका निभाएगी.
