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भारत की कूटनीति पर ईरान की सराहना: क्या बनेगा मध्यस्थता का नया दौर?

भारत की कूटनीति को ईरान द्वारा सराहा गया है, खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच। ईरान के प्रतिनिधियों ने भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है, जबकि अमेरिका ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। क्या भारत इस संकट में मध्यस्थता कर पाएगा? जानें इस लेख में भारत की कूटनीति, ईरान की प्रशंसा और अमेरिका की स्थिति के बारे में।
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भारत की कूटनीति पर ईरान की सराहना: क्या बनेगा मध्यस्थता का नया दौर?

भारत की कूटनीति को मिली अंतरराष्ट्रीय सराहना


नई दिल्ली: भारत की संतुलित और प्रभावशाली कूटनीति को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उसकी विदेश नीति की खुलकर तारीफ की है. ऐसे समय में जब क्षेत्रीय हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, भारत को एक भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है.


भारत की भूमिका पर ईरान की प्रशंसा

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच भारत की सक्रिय कूटनीतिक बातचीत और संतुलित रुख ने उसे एक संभावित समाधानकर्ता के रूप में स्थापित किया है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ते संकट के बीच भारत की भूमिका और भी अहम मानी जा रही है.


ईरान ने की भारत की कूटनीति की सराहना


ईरान के सुप्रीम लीडर के भारत में प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने भारत की कूटनीति की प्रशंसा करते हुए कहा, 'भारतीय कूटनीति बहुत अच्छी है और वे इस मुद्दे में अधिक बड़ी भूमिका भी निभा सकते हैं.'


उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को एक महीने से अधिक समय हो चुका है और स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है.


भारत की विदेश नीति की विशेषताएँ

भारत की विदेश नीति को बताया संतुलित और प्रभावी


भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने भी हाल ही में भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया था. उन्होंने कहा, 'भारत निश्चित रूप से तनाव कम करने में एक प्रभावी और सकारात्मक भूमिका निभा सकता है. ग्लोबल साउथ के एक प्रमुख देश के रूप में और अपनी संतुलित विदेश नीति के कारण, भारत तनाव कम करने और बातचीत को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए एक विशेष स्थान रखता है.'


उन्होंने आगे कहा, 'भारत के सभी पक्षों के साथ ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध हैं, जो इसे गलतफहमियों को कम करने और राजनयिक रास्तों को मजबूत करने में एक भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाते हैं.'


जयशंकर की सक्रिय कूटनीतिक पहल

जयशंकर की सक्रिय कूटनीतिक पहल


भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हालात को लेकर लगातार संवाद बनाए रखा है. उन्होंने जानकारी दी, 'ईरान के विदेश मंत्री अराघची का फोन आया. मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई.'


इसके अलावा जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी बातचीत की. इन चर्चाओं में पश्चिम एशिया की स्थिति और ऊर्जा आपूर्ति जैसे अहम मुद्दे शामिल रहे.


अमेरिका की चेतावनी

ट्रंप की कड़ी चेतावनी


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि 7 अप्रैल तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा.


उन्होंने कहा कि मंगलवार को 'पावर प्लांट डे' और 'ब्रिज डे' घोषित किया गया है और चेतावनी दी कि ऐसा हमला पहले कभी नहीं हुआ होगा.


स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना वैश्विक चिंता का केंद्र


स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है. फरवरी 2026 में संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान द्वारा इस मार्ग पर कड़ा नियंत्रण कर लिया गया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला.


ट्रंप की चेतावनी को इसी वैश्विक संकट को खत्म करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.