भारत की मदद से ईरान संकट में, मिडिल ईस्ट में खाद्य सुरक्षा का संकट गहरा
मिडिल ईस्ट में युद्ध और भारत की भूमिका
अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान के खिलाफ चल रहे इस गंभीर संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। इस समय जब मध्य पूर्व के देशों में जहाजों की आवाजाही रुक गई है और उड़ानें रद्द हो रही हैं, खाद्य सुरक्षा का संकट भी गहरा गया है। ऐसे में भारत ने एक बार फिर अपनी मित्रता का हाथ बढ़ाया है। मदद की गुहार लगाते ही भारत ने सैकड़ों टन सहायता भेजी, जिससे ईरान भी चकित रह गया। यह युद्ध, जो 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ, अमेरिका द्वारा 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान पर बड़े हमलों के साथ शुरू हुआ। यह संघर्ष केवल एक सामान्य युद्ध नहीं है, बल्कि यह मध्य पूर्व के भूगोल को भी बदल सकता है।
युद्ध की शुरुआत और उसके प्रभाव
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने का एक उपाय बताया। प्रारंभ में ही इजराइल और अमेरिका ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को मार गिराया, जो ईरान की राजनीति के लिए एक बड़ा झटका था। इसके बाद ईरान ने जवाबी हमले शुरू किए, जिसमें इजराइल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शामिल थे। 9 मार्च 2026 तक, यह युद्ध अपने 10वें दिन में पहुंच चुका है, और अमेरिका तथा इजराइल ने ईरान के तेल डिपो और न्यूक्लियर साइट्स पर लगातार हमले किए हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इस संघर्ष के कारण वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, ब्रेंट क्रूड की कीमत प्रति बैरल $ से ऊपर जा चुकी है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, कीमतों में 20% की वृद्धि हुई है। स्टेट ऑफ ऑर्बुज, जो विश्व के 20% तेल का मार्ग है, लगभग पूरी तरह से बंद हो चुका है। ईरान ने ऊर्जा युद्ध की धमकी दी है, जबकि अमेरिका ने बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की है। इजराइल ने ईरान के नए नेता मुजतबा खामनेई को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी है।
भारत की चिंता और खाद्य सुरक्षा का संकट
भारत के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है, क्योंकि देश का 55 से 60% तेल आयात गल्फ देशों से होता है। इस युद्ध में भारत की भूमिका एक मित्र के रूप में है, जो संकट के समय मदद कर रहा है। मिडिल ईस्ट में खाद्य सुरक्षा का संकट भी गहरा हो गया है। यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों में 90% से अधिक खाद्य सामग्री आयात की जाती है। रेगिस्तानी जलवायु के कारण कृषि सीमित है, और सामान्य समय में ये देश यूरोप, एशिया और अमेरिका से फल, सब्जियां और अनाज आयात करते हैं। लेकिन इस युद्ध ने सब कुछ बदल दिया है।
युद्ध का प्रभाव और भविष्य की चुनौतियाँ
स्टेट ऑफ हॉर्मोज के बंद होने से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। कई उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, और कार्गो सेवाएं भी कम हो गई हैं। अंतरराष्ट्रीय पैसेंजर विमानों के कार्गो होल्ड में ताजे फल भेजे जाते हैं, लेकिन अब यह भी प्रभावित हो रहा है।
