भारत की वैश्विक भूमिका: ब्रिक्स बैठक में प्रमुख नेताओं की उपस्थिति
भारत में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बीच, रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों ने पीएम मोदी से मुलाकात की। यह सम्मेलन वैश्विक तनाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। जानें कैसे भारत एक वैश्विक शांति निर्माता के रूप में उभर रहा है और इस बैठक का महत्व क्या है।
| May 14, 2026, 18:35 IST
भारत में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। ट्रंप का बयान भारत के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी हो सकता है। इसी दौरान, रूस के विदेश मंत्री सरगई लवरोव भारत पहुंचे और कहा कि हिंदी और रूसी एक-दूसरे के भाई हैं। दिल्ली का तापमान केवल मौसम के कारण नहीं, बल्कि उच्च स्तरीय रणनीतिक गतिविधियों के कारण भी बढ़ा हुआ है। इस समय, दुनिया की निगाहें नई दिल्ली पर हैं, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रूस और ईरान के विदेश मंत्री उपस्थित थे। सवाल यह है कि इस वैश्विक तनाव के बीच ये दिग्गज अचानक भारत क्यों आए हैं? दरअसल, ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक दिल्ली में शुरू हो चुकी है, और प्रधानमंत्री मोदी ने इन मंत्रियों से मुलाकात की। रूस, ईरान, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रियों के साथ पीएम मोदी की यह मुलाकात केवल औपचारिकता नहीं थी। जब ब्रिक्स परिवार की फोटो के लिए सभी एकत्र हुए, तो स्पष्ट संदेश था कि भारत ग्लोबल साउथ की आवाज है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक ओर रूस यूक्रेन युद्ध में उलझा हुआ है, वहीं दूसरी ओर ईरान और इजराइल के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है।
भारत की भूमिका और वैश्विक चुनौतियाँ
अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का सामना कर रहे ये दोनों देश भारत में पीएम मोदी से मिलने आए हैं, जो दर्शाता है कि नई दिल्ली आज के समय में एक वैश्विक शांति निर्माता की भूमिका निभा रही है। ईरान के विदेश मंत्री का भारत आना यह संकेत देता है कि ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए भारत उनकी प्राथमिकता है, चाहे पश्चिम का दबाव कितना भी हो। बैठक के पहले दिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी बात स्पष्टता से रखी। उन्होंने कहा कि दुनिया भू-राजनीतिक उथल-पुथल और व्यापारिक व्यवधानों का सामना कर रही है। जयशंकर ने ब्रिक्स देशों से आग्रह किया कि वे व्यावहारिक समाधान खोजें। उनका संदेश स्पष्ट था कि केवल बातचीत से काम नहीं चलेगा, बल्कि युद्ध और संघर्ष के बीच व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
भारत का कूटनीतिक दृष्टिकोण
जयशंकर ने शांति के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर देकर भारत का स्टैंड स्पष्ट किया। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब रेड सी और पश्चिम एशिया में तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। ईरान और इजराइल के बीच संभावित टकराव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत ने दुनिया को आगाह किया है कि आर्थिक अनिश्चितताएं और जलवायु चुनौतियाँ अब हमारे दरवाजे पर हैं। ब्रिक्स को एक स्थिरता लाने वाली शक्ति बनना होगा। यह 11 उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जो दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। जब भारत इस समूह की अध्यक्षता करता है, तो वह केवल अपने हितों का नहीं, बल्कि पूरी विकासशील दुनिया का नेतृत्व करता है।
