भारत के लिए राहत: एक्वा टाइटन जहाज लेकर आया रूसी कच्चा तेल
भारत को एक्वा टाइटन नामक जहाज से रूसी कच्चा तेल मिलने की उम्मीद है, जो ऊर्जा संकट के बीच राहत प्रदान करता है। यह टैंकर पहले चीन की ओर जा रहा था, लेकिन अब इसका मार्ग बदलकर भारत की ओर मोड़ दिया गया है। इस खबर से शेयर बाजार में तेजी आई है। जानें इस टैंकर के बारे में और भी महत्वपूर्ण जानकारी।
| Mar 21, 2026, 11:49 IST
भारत को मिली राहत
महायुद्ध के बाद उत्पन्न ऊर्जा संकट के बीच भारत को एक सकारात्मक समाचार मिला है। आज एक्वा टाइटन नामक जहाज लगभग 770 बैरल रूसी कच्चा तेल लेकर मंगलौर पहुंचने वाला है। शिपिंग डेटा और सूत्रों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में कोई अन्य कच्चा तेल टैंकर इस जलमार्ग से बाहर नहीं निकला है। हालांकि, भारतीय ध्वज वाले दो गैस टैंकर आने वाले दिनों में होमूस से गुजरने की योजना बना रहे हैं। शिवालिक और नंदा देवी जैसे जहाजों ने पहले भी इस मार्ग से यात्रा की है। ऐसे में गैस की कमी की समस्या पर सरकार ने बार-बार स्पष्ट किया है कि कोई संकट नहीं है, और कई भारतीय जहाज लगातार तेल और एलपीजी लेकर भारत आ रहे हैं।
रूसी तेल टैंकर का मार्ग परिवर्तन
पहले चीन की ओर जा रहा था
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि रूसी तेल टैंकर एक्वा टाइटन (जिसका पूर्व नाम लैंग या था) को एमआरपीएल द्वारा किराए पर लिया गया है और अब यह न्यू मैंगलोर बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। जहाज के 21 मार्च को पहुंचने की उम्मीद है। यह टैंकर रूस के यूराल्स क्रूड से भरा हुआ है और पहले यह चीन की ओर जा रहा था, लेकिन बाद में इसका मार्ग बदलकर भारत की ओर मोड़ दिया गया। भारतीय अधिकारियों ने पहले जहाज के मार्ग परिवर्तन की जानकारी नहीं होने की बात कही थी, लेकिन बाद में बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राकेश कुमार सिन्हा ने पुष्टि की कि टैंकर अब कच्चे तेल के साथ भारत की ओर बढ़ रहा है।
प्रतिबंधित जहाजों की सूची में शामिल
प्रतिबंधित पोत
जून में, ऑस्ट्रेलिया द्वारा रूसी कच्चे तेल की ढुलाई के लिए प्रतिबंधित 60 जहाजों में एक्वा टाइटन भी शामिल था। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कहा कि ये जहाज धोखाधड़ी वाली प्रथाओं का उपयोग करते हैं, जैसे ध्वज बदलना और ट्रैकिंग सिस्टम को निष्क्रिय करना। एक्वा टाइटन पर ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोपीय संघ और यूक्रेन द्वारा भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। नॉर्वे स्थित ऊर्जा खुफिया कंपनी रायस्टैड एनर्जी के वरिष्ठ विश्लेषक एरिक ग्रुंड्ट ने बताया कि इन जहाजों पर अंततः रूसी सरकार का नियंत्रण होता है। अमेरिका ने पहले भारत पर रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 25% टैरिफ लगाया था, लेकिन बाद में एक अंतरिम व्यापार समझौते के तहत इसे रद्द कर दिया गया।
