भारत के विदेश मंत्री की बांग्लादेश यात्रा ने राजनीतिक हलचल मचाई
डॉ. एस जयशंकर की बांग्लादेश यात्रा
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बांग्लादेश में अपनी चार घंटे की यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश दिया है। इस यात्रा ने बांग्लादेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस से मुलाकात नहीं की, जिससे यह संकेत मिलता है कि भारत की नजर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर है।
जयशंकर ने ढाका में पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भाग लिया और उनके बेटे तारिक रहमान से मुलाकात की। इस मुलाकात ने बांग्लादेश की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने यूनुस को एक अस्थायी नेता मानते हुए उनकी अनदेखी की है। यह कदम भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।
यूनुस से दूरी और तारिक रहमान के साथ मुलाकात
डॉ. जयशंकर की यूनुस से दूरी ने सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना दिया है। यह सवाल उठता है कि क्या यह एक सोची-समझी रणनीति है? भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के भविष्य को लेकर संदेह में है।
तारिक रहमान के साथ मुलाकात को एक कूटनीतिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि उन्हें बांग्लादेश के अगले संभावित प्रधानमंत्री के रूप में देखा जा रहा है। इस मुलाकात से भारत ने यह संदेश दिया है कि वह बांग्लादेश के भविष्य को लेकर गंभीर है।
बांग्लादेश की राजनीति में बदलाव
विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश में चुनावों के बाद तारिक रहमान की सत्ता में वापसी की संभावना है। ऐसे में भारत ने यूनुस से दूरी बनाकर एक स्पष्ट संदेश दिया है।
तारिक रहमान ने हाल ही में कट्टरपंथी सहयोगियों से दूरी बनाई है और बांग्लादेश की राजनीति में एक नई दिशा की ओर बढ़ रहे हैं।
