भारत ने अमेरिका के व्यापार समझौते पर उठाए सवाल, मोदी-ट्रंप बातचीत पर विवाद
भारत ने अमेरिकी वाणिज्य सचिव के बयान को किया खारिज
नई दिल्ली: भारत ने शुक्रवार को अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के उस बयान को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधे बात नहीं की। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पिछले वर्ष से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर लगातार बातचीत चल रही है और कई बार समझौते के करीब पहुंचने की स्थिति भी बनी है।
रणधीर जायसवाल का स्पष्टीकरण
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा, "भारत और अमेरिका 13 फरवरी 2025 से व्यापार समझौते पर चर्चा कर रहे हैं। दोनों पक्ष संतुलित और लाभकारी समझौते पर पहुंचने के लिए कई दौर की बातचीत कर चुके हैं। कुछ रिपोर्ट्स में इन वार्ताओं का विवरण सही नहीं है।" उन्होंने यह भी बताया कि मोदी और ट्रंप ने 2025 में आठ बार फोन पर बातचीत की, जिसमें दोनों नेताओं ने अपनी साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
टैरिफ और गतिरोध
लटनिक ने ऑल-इन पॉडकास्ट में कहा था कि भारत-अमेरिका समझौता इसलिए रुका क्योंकि मोदी ने ट्रंप को व्यक्तिगत रूप से कॉल नहीं किया। इसके बाद अगस्त में ट्रंप ने भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लगाया, जिसमें रूस से तेल की खरीद पर 25% अतिरिक्त शुल्क और 25% पारस्परिक टैरिफ शामिल था। लटनिक ने कहा कि भारत गलत दिशा में चला गया और समय महत्वपूर्ण था, जबकि देरी भारत की जटिल राजनीतिक प्रक्रियाओं को दर्शाती है।
व्यापारिक मुद्दे और व्यक्तिगत नाराजगी
अमेरिका का यह रुख दर्शाता है कि ट्रंप की कड़ी टैरिफ नीति व्यापारिक मुद्दों से अधिक व्यक्तिगत नाराजगी से प्रेरित थी। लटनिक ने यह भी कहा कि भारत पहले जिन शर्तों पर समझौते के करीब था, वे अब मान्य नहीं हैं। उन्होंने ब्रिटेन के उदाहरण का हवाला दिया, जहां प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने समय पर ट्रंप से बात करके समझौते को अंतिम रूप दिया।
भारत की प्रतिबद्धता
रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत दोनों देशों के बीच लाभकारी व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और वार्ता को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए उत्सुक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भारत इस गतिरोध का समाधान निकालने में सफल होगा।
अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक प्रभाव
टैरिफ और लंबित वार्ता के कारण निवेशकों में असुरक्षा बढ़ी है और रुपये पर दबाव पड़ा है। इसके अलावा, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि भारत रूस से तेल का आयात कम नहीं करता है तो टैरिफ में और वृद्धि की जा सकती है। इस बीच, व्यापार समझौते का भविष्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।
