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भारत-पाकिस्तान जल विवाद: सिंधु जल संधि पर भारत का कड़ा रुख

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर तनाव फिर से बढ़ गया है। भारत ने एक विवादास्पद मध्यस्थता अदालत के निर्णय को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि वह इस अवैध निकाय को मान्यता नहीं देता। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि संधि को स्थगित रखने का निर्णय तब तक प्रभावी रहेगा जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता। जानिए इस विवाद का क्या असर होगा और भारत का क्या रुख है।
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भारत-पाकिस्तान जल विवाद: सिंधु जल संधि पर भारत का कड़ा रुख

भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद में नया मोड़


नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर तनाव फिर से बढ़ गया है। भारत ने 15 मई को एक विवादास्पद मध्यस्थता अदालत द्वारा दिए गए निर्णय को पूरी तरह से अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि वह इस अवैध निकाय को मान्यता नहीं देता। भारत ने यह भी दोहराया कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का उसका निर्णय अब भी प्रभावी है।


विदेश मंत्रालय की स्थिति

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत की संप्रभुता से जुड़े मामलों में किसी भी तथाकथित मध्यस्थता अदालत को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। भारत का कहना है कि संधि को स्थगित करने का निर्णय अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसके अधिकारों के अनुरूप लिया गया है और यह तब तक जारी रहेगा जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना विश्वसनीय तरीके से बंद नहीं करता।


विदेश मंत्रालय का बयान

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने कहा कि अवैध रूप से गठित कथित मध्यस्थता न्यायालय ने 15 मई को अधिकतम जल ग्रहण क्षेत्र से संबंधित एक निर्णय दिया है, जो सिंधु जल संधि की सामान्य व्याख्या के मुद्दों पर दिए गए फैसलों का पूरक है। भारत इस तथाकथित फैसले को पूरी तरह से खारिज करता है, ठीक उसी तरह जैसे उसने अवैध रूप से गठित मध्यस्थता न्यायालय के सभी पूर्व निर्णयों को दृढ़ता से खारिज किया है। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यस्थता न्यायालय द्वारा जारी कोई भी कार्यवाही या निर्णय अमान्य है।


भारत का यह कदम क्यों?

भारत ने पिछले साल जून में स्पष्ट किया था कि इस मध्यस्थता निकाय का गठन स्वयं सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन है। इसके बाद पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक संधि स्थगित रहेगी।


संधि स्थगित होने के प्रभाव

विदेश मंत्रालय के अनुसार, जब तक सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी, भारत इस समझौते के तहत किसी भी दायित्व को निभाने के लिए बाध्य नहीं होगा। भारत ने यह भी कहा कि कोई भी मध्यस्थता अदालत, विशेष रूप से वह जिसका कानून की नजर में कोई वैध अस्तित्व नहीं है, भारत के संप्रभु अधिकारों के तहत लिए गए फैसलों की वैधता की जांच नहीं कर सकती।