मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका-इजराइल संघर्ष की स्थिति गंभीर
संघर्ष की बढ़ती तीव्रता
ईरान और अमेरिका-इजराइल गठबंधन के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मध्य पूर्व में प्रत्यक्ष सैन्य टकराव का सिलसिला सातवें दिन भी जारी है, और हालात सामान्य होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले छह दिनों में ईरान में इस संघर्ष में 1,200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जबकि लेबनान में 70 से अधिक और इजराइल में लगभग एक दर्जन लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। यह युद्ध न केवल मध्य पूर्व, बल्कि 14 अन्य देशों को भी प्रभावित कर रहा है। ईरान द्वारा कुवैत पर किए गए हमलों के बाद, अमेरिकी दूतावास को बंद कर दिया गया है, जो कि इस क्षेत्र में काम करने वाला दूसरा अमेरिकी राजनयिक मिशन है जो पूरी तरह से बंद हुआ है। उल्लेखनीय है कि कुवैत में एक ईरानी ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी।
ईरान के राष्ट्रपति का बयान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने सोशल मीडिया पर कहा है कि कुछ देशों ने मध्यस्थता के प्रयास शुरू कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन अपने देश की गरिमा और संप्रभुता की रक्षा करने में कोई संकोच नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यस्थता में उन लोगों को शामिल किया जाना चाहिए जिन्होंने ईरानी जनता को कम आंका और इस संघर्ष को भड़काया।
अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सुझाव दिया है कि ईरान के अगले सर्वोच्च नेता के चुनाव में अमेरिका की भूमिका होनी चाहिए। इससे यह सवाल उठता है कि क्या वाशिंगटन और इजराइल सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहे हैं या नीतिगत रियायतें मांग रहे हैं, क्योंकि यह संघर्ष अनिश्चित काल तक चलने की संभावना है। तेहरान ने मध्य पूर्व के सैन्य और आर्थिक ढांचे को नष्ट करने की चेतावनी दी है, जिससे वित्तीय बाजारों में हलचल मची है। तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण डॉव जोन्स इंडेक्स में 1,000 अंकों की गिरावट आई है।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात
कांग्रेस पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को नई दिल्ली में ईरान कल्चर हाउस पहुंचा और वहां ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या पर गहरा शोक व्यक्त किया।
ईंधन की कमी की अफवाहें
उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी मच गई है, जब निवासियों के बीच ईंधन की संभावित कमी की अफवाहें फैल गईं। खेड़ी जिले के निघासन, पल्लिया और भीरा जैसे इलाकों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं, क्योंकि लोग पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण आपूर्ति खत्म होने के डर से पेट्रोल और डीजल खरीदने के लिए दौड़ पड़े। इस स्थिति के कारण कई पेट्रोल पंपों पर जाम लग गया।
