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मध्य पूर्व संकट का असर: तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों में गिरावट

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य संघर्ष का असर वैश्विक तेल की कीमतों पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे शेयर बाजारों में गिरावट आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संघर्ष की संभावित अवधि के बारे में चिंता जताई है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। OPEC ने उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह पर्याप्त नहीं होगा। जानें इस संकट का वैश्विक बाजारों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
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मध्य पूर्व संकट का असर: तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों में गिरावट

तेल की कीमतों में वृद्धि


नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य संघर्ष का प्रभाव अब तेल की कीमतों पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। सोमवार को वैश्विक बाजारों में हलचल मची, जिससे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं, शेयर बाजार में गिरावट आई और निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ने लगे। यदि यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है, तो महंगाई और आर्थिक दबाव में वृद्धि हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 7.5% बढ़कर 78.34 डॉलर प्रति बैरल हो गई।


अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि

अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत भी 7.3% बढ़कर 71.88 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। सोने की कीमतों में भी तेजी आई, जो 1.5% बढ़कर 5,358 डॉलर प्रति औंस हो गई। निवेशकों ने अस्थिरता के इस माहौल में सोने और डॉलर को सुरक्षित विकल्प माना है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों में कमी के कोई संकेत नहीं हैं, और ईरान ने भी मिसाइल हमले किए हैं, जिससे यह चिंता बढ़ गई है कि यह संघर्ष और देशों को प्रभावित कर सकता है।


संघर्ष की संभावित अवधि

ट्रंप का संकेत: लंबा चल सकता है संघर्ष

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यह टकराव चार हफ्तों तक जारी रह सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक अमेरिका के लक्ष्य पूरे नहीं होते, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। इस बयान ने बाजार में चिंता को और बढ़ा दिया है।


होर्मुज जलडमरूमध्य पर नजरें

होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी नजरें

इस समय दुनिया का ध्यान होर्मुज जलडमरूमध्य पर है, जहां से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% गुजरता है। हालाँकि, रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है, लेकिन टैंकरों की आवाजाही धीमी हो गई है। कई जहाज बीमा और सुरक्षा कारणों से आगे बढ़ने में हिचकिचा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यहां से आपूर्ति बाधित होती है, तो रोजाना लगभग 1.5 करोड़ बैरल तेल बाजार में नहीं पहुंच पाएगा, जिससे कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।


OPEC का उत्पादन बढ़ाने का निर्णय

तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC ने अप्रैल के लिए उत्पादन में मामूली वृद्धि की घोषणा की है। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा तनाव को देखते हुए यह वृद्धि अपर्याप्त होगी। कुछ विशेषज्ञों ने इसकी तुलना 1970 के दशक के मध्य पूर्व तेल प्रतिबंध से की है, जब तेल की कीमतें कई गुना बढ़ गई थीं। उनका मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं।


वैश्विक बाजारों में गिरावट

एशियाई और अमेरिकी बाजारों में गिरावट

तेल की बढ़ती कीमतों का असर एशियाई बाजारों में स्पष्ट रूप से देखा गया। जापान, जो अपना अधिकांश तेल आयात करता है, वहां निक्केई सूचकांक 2.3% गिर गया। दक्षिण कोरिया में भी बाजार 1% नीचे आया। एशिया-प्रशांत क्षेत्र का व्यापक सूचकांक 0.6% गिरा। यूरोप में EUROSTOXX 50 और DAX फ्यूचर्स में लगभग 2% की गिरावट आई। अमेरिका में S&P 500 और NASDAQ फ्यूचर्स में भी 1% से अधिक की कमजोरी देखी गई।


डॉलर और बॉंड में मजबूती

डॉलर और बॉंड में मजबूती

मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती देखी गई। यूरो 0.4% गिर गया, जबकि डॉलर के मुकाबले येन भी कमजोर हुआ। 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉंड की यील्ड घटकर 3.926% पर आ गई, जो तीन महीने का निचला स्तर है। निवेशक अस्थिर माहौल में बॉंड को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।