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मध्य पूर्व संघर्ष: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर आईएमएफ की चेतावनी

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों की चेतावनी दी है। ईरान से जुड़े संघर्ष ने क्षेत्रीय और वैश्विक वित्तीय स्थिरता को खतरे में डाल दिया है। आईएमएफ ने सदस्य देशों को सलाह दी है कि वे सोच-समझकर नीतिगत निर्णय लें और खाद्य असुरक्षा के बढ़ते खतरे के प्रति सतर्क रहें। जानें इस संकट के संभावित परिणाम और जी-7 देशों की प्रतिबद्धता के बारे में।
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मध्य पूर्व संघर्ष: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर आईएमएफ की चेतावनी

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट का साया


मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। आईएमएफ के प्रमुख अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रकाशित एक ब्लॉग में बताया गया है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद यह संघर्ष एक गंभीर आर्थिक झटका बन गया है, जिससे वित्तीय स्थिति और भी कठिन हो गई है।


सदस्य देशों के लिए सलाह

आईएमएफ के अनुसार, इस युद्ध का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि यह संघर्ष कितने समय तक चलता है और इसका दायरा कितना बढ़ता है। संगठन ने अपने सदस्य देशों को सलाह दी है कि वे स्थिति को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर नीतिगत निर्णय लें। इसके साथ ही, आईएमएफ ने आश्वासन दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर वह देशों को वित्तीय सहायता और नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करता रहेगा।


जी-7 देशों की प्रतिबद्धता

यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों ने ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने और आर्थिक अस्थिरता को कम करने के लिए हर संभव प्रयास करने का संकल्प लिया है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने और क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने से वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी बाधा उत्पन्न हुई है। सामान्य परिस्थितियों में, दुनिया के कुल तेल का लगभग 25 से 30 प्रतिशत और एलएनजी का करीब 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है।


खाद्य असुरक्षा का खतरा

आईएमएफ ने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि कम आय वाले देशों के सामने खाद्य असुरक्षा का खतरा बढ़ सकता है। खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की कीमतों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जबकि कई विकसित देश अपनी विदेशी सहायता को घटा रहे हैं। ऐसे में गरीब देशों को अतिरिक्त वैश्विक सहयोग की आवश्यकता हो सकती है।


विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध के विभिन्न प्रभाव हो सकते हैं, लेकिन अधिकांश स्थितियों में परिणाम महंगाई में वृद्धि और आर्थिक विकास की गति धीमी होने के रूप में सामने आएंगे। एशिया और यूरोप के ऊर्जा आयातक देशों पर ईंधन की कीमतों का सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है, जबकि अफ्रीका और एशिया के कई देशों को ऊंची कीमतों पर भी आवश्यक संसाधन जुटाने में कठिनाई हो रही है।


आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी, ऊर्जा महंगी होती जाएगी और महंगाई को नियंत्रित करना और भी कठिन हो जाएगा। संस्था ने कहा कि वह 14 अप्रैल को जारी होने वाली अपनी विश्व आर्थिक आउटलुक रिपोर्ट में इस संकट का विस्तृत आकलन प्रस्तुत करेगी। साथ ही, सदस्य देशों से सतर्क रहने और मिलकर इस चुनौती का सामना करने की अपील की गई है।