मलेशिया में 7.1 तीव्रता का भूकंप: क्या है स्थिति?
भूकंप का विवरण
नई दिल्ली : मलेशिया के बोर्नियो द्वीप के साबाह राज्य में एक शक्तिशाली भूकंप ने रात के सन्नाटे को तोड़ दिया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, इस भूकंप की तीव्रता 7.1 मापी गई और इसका केंद्र कोटा किनाबालू शहर से लगभग 100 किलोमीटर पूर्वोत्तर दिशा में समुद्र में था। यह भूकंप स्थानीय समयानुसार आधी रात के करीब 12:57 बजे आया, और इसकी गहराई लगभग 620 किलोमीटर थी, जिससे सतह पर प्रभाव कम रहा। अभी तक किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान या सुनामी की सूचना नहीं मिली है।
भूकंप का समय और प्रभाव
आधी रात को आया भूकंप
यह भूकंप रविवार की आधी रात को आया, जब अधिकांश लोग सो रहे थे। इसका केंद्र कोटा किनाबालू के उत्तर-पूर्व में था, जो साबाह की राजधानी और एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। गहराई अधिक होने के कारण झटके दूर-दूर तक महसूस किए गए, लेकिन तीव्रता कम रही। स्थानीय निवासियों ने हल्के से मध्यम स्तर के कंपन की सूचना दी है।
गहराई का महत्व
गहराई का महत्व
USGS ने पुष्टि की है कि भूकंप 619.8 किलोमीटर की गहराई पर आया था। इस तरह के भूकंपों को गहरे फोकस वाले भूकंप कहा जाता है, जिनमें सतह पर ऊर्जा का प्रभाव कम होता है, जिससे इमारतों को नुकसान कम होता है। यही कारण है कि अभी तक किसी बड़े विनाश या हताहत की खबर नहीं आई है।
सुनामी का खतरा
सुनामी का खतरा नहीं
चूंकि भूकंप का केंद्र समुद्र में था और गहराई बहुत अधिक थी, इसलिए सुनामी की आशंका नहीं जताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि 7.0 से अधिक तीव्रता वाले भूकंप में यदि गहराई 30 किलोमीटर से कम हो, तो सुनामी का जोखिम बढ़ जाता है। यहां स्थिति इसके विपरीत थी, जिससे तटीय क्षेत्रों में राहत की सांस ली जा रही है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
कोटा किनाबालू और आस-पास के क्षेत्रों में कई लोगों ने रात में अचानक झटके महसूस किए और घरों से बाहर निकल आए। कुछ ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किए, जिसमें हल्के हिलने की झलक दिखाई दे रही थी। प्रशासन ने लोगों से शांत रहने और आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। फिलहाल कोई आपात स्थिति नहीं घोषित की गई है।
भूकंप की निगरानी
भूकंप की निगरानी जारी
मलेशिया के मौसम विभाग और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां स्थिति पर नजर रख रही हैं। बोर्नियो द्वीप पर भूकंप की घटनाएं कभी-कभी होती रहती हैं, क्योंकि यह क्षेत्र टेक्टॉनिक प्लेटों के प्रभाव क्षेत्र में आता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार गहराई अधिक होने से बड़ा खतरा टल गया है। आगे के झटकों की आशंका बनी हुई है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।
