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माली में जिहादी हमलों से मची तबाही, 80 से अधिक मृतकों की आशंका

पश्चिम अफ्रीका के माली में हालिया जिहादी हमलों ने बामको और उसके आसपास के क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है। इन हमलों में 70 से अधिक लोगों की जान चली गई है, और मृतकों की संख्या 80 से अधिक होने की आशंका है। अल-कायदा से जुड़े संगठन JNIM ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। गांवों पर हुए हमलों के पीछे स्थानीय समझौतों पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने का कारण बताया गया है। इसके अलावा, केनीरोबा सेंट्रल जेल पर हुए हमले में कई कैदी फरार हो गए हैं। माली की सेना की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, जबकि आतंकवादियों की गतिविधियाँ बढ़ती जा रही हैं।
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माली में जिहादी हमलों से मची तबाही, 80 से अधिक मृतकों की आशंका

माली में जिहादी हमलों का कहर

पश्चिम अफ्रीका के माली में बामको और उसके आस-पास के क्षेत्रों में जिहादी हमलों ने भारी तबाही मचाई है। बामको से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित केनीरोबा सेंट्रल जेल और आसपास के गांवों में हुए इन हमलों में अब तक 70 से अधिक लोगों की जान चली गई है। स्थानीय अधिकारियों का मानना है कि मृतकों की संख्या 80 से अधिक हो सकती है। अल-कायदा से जुड़े संगठन 'जमात नुसरत अल-इस्लाम वल मुस्लिमीन' (JNIM) ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है।


गांवों पर हमले

बुधवार को माली के कई गांवों में अचानक छापे मारे गए, जिसमें 30 ग्रामीणों की हत्या कर दी गई। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, इन गांवों को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने JNIM द्वारा पेश किए गए स्थानीय समझौतों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद शुक्रवार को भी सिलसिलेवार हमले हुए, जिससे मरने वालों की संख्या में वृद्धि हुई।


केनीरोबा सेंट्रल जेल पर हमला

आतंकियों ने बामको के निकट स्थित नई केनीरोबा सेंट्रल जेल पर हमला किया, जहां 2,500 कैदी बंद थे। हमले के दौरान जेल की सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो गई और कई कैदी भागने में सफल रहे, जिनमें 72 ऐसे कैदी शामिल हैं जिन्हें सरकार ने सबसे खतरनाक माना था। सुरक्षा एजेंसियां अब इन फरार कैदियों की तलाश में जुटी हैं।


JNIM की योजना

JNIM ने पिछले सप्ताह एक आधिकारिक घोषणा की थी जिसमें उन्होंने बामको की घेराबंदी करने की योजना का खुलासा किया था। संगठन ने कहा है कि वे राजधानी की ओर जाने वाली सभी मुख्य सड़कों पर चेकपॉइंट स्थापित करेंगे, ताकि शहर में आने-जाने वाले सामान और राशन को रोका जा सके और सरकार को पूरी तरह से बेबस किया जा सके।


सेना की भूमिका पर सवाल

स्थानीय लोग अपनी सेना से काफी नाराज हैं। उनका कहना है कि सेना पास में थी, लेकिन बार-बार बुलाने पर भी मदद के लिए नहीं आई। इससे पहले अप्रैल के अंत में हुए एक बड़े हमले में माली के रक्षा मंत्री सादियो कैमारा भी मारे गए थे। बिगड़ते हालात को देखते हुए रुसी सैनिकों को भी किडल जैसे महत्वपूर्ण शहर से पीछे हटना पड़ा है।


आतंकवादियों की बढ़ती गतिविधियाँ

माली की सेना के वरिष्ठ अधिकारी जिब्रिला मैगा ने बताया कि हाल के समय में हमले इसलिए बढ़े हैं क्योंकि दो अलग-अलग आतंकी गुट एक साथ मिल गए हैं। हालांकि सेना का कहना है कि वे आतंकियों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।