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मिडिल ईस्ट में संघर्ष: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सीज़फायर पर चर्चा

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब 33वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसमें अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सीज़फायर पर चर्चा हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 45 दिनों के संघर्ष-विराम की योजना बनाई जा रही है, जो स्थायी शांति समझौते का आधार बन सकती है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान को कई प्रस्ताव दिए हैं, लेकिन अभी तक कोई सहमति नहीं बनी है। इस बीच, IRGC ने अमेरिका और इज़रायल को चेतावनी दी है कि फारस की खाड़ी में सुरक्षा व्यवस्था बदल रही है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और अधिक।
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मिडिल ईस्ट में संघर्ष: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सीज़फायर पर चर्चा

संघर्ष का 33वां दिन

तेहरान/वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच संघर्ष अब 33वें दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी चेतावनियों को और कड़ा कर दिया है, जबकि तेहरान की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।


संघर्ष-विराम पर चर्चा

Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ 45 दिनों के संभावित संघर्ष-विराम (सीज़फायर) पर विचार कर रहे हैं, जो आगे स्थायी शांति समझौते का आधार बन सकता है। यह जानकारी अमेरिकी, इज़रायली और क्षेत्रीय सूत्रों से प्राप्त हुई है।


डील की रूपरेखा

रिपोर्ट में दो-फेज़ वाली डील का खाका प्रस्तुत किया गया है। पहले चरण में 45 दिन का सीज़फायर प्रस्तावित है, जिसके दौरान स्थायी युद्ध समाप्त करने पर बातचीत की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ, तो इस अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है। दूसरे चरण में युद्ध समाप्त करने के लिए अंतिम समझौता किया जाएगा।


बातचीत का माध्यम

बातचीत पाकिस्तानी, मिस्री और तुर्की मध्यस्थों के माध्यम से चल रही है। इसके अलावा, ट्रंप के दूत Steve Witkoff और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच टेक्स्ट संदेशों के जरिए भी संपर्क बना हुआ है। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने हाल के दिनों में ईरान को कई प्रस्ताव दिए हैं, लेकिन अभी तक उन्हें स्वीकार नहीं किया गया है।


IRGC की चेतावनी

इस बीच, Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने 5 अप्रैल को Strait of Hormuz को लेकर अमेरिका और इज़रायल को कड़ी चेतावनी दी है। संगठन ने कहा कि फारस की खाड़ी में नई सुरक्षा व्यवस्था बन रही है और यह अहम समुद्री मार्ग अब पहले जैसा नहीं रहेगा।


ट्रंप की चेतावनी

दूसरी ओर, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बना सकता है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल देखा जा रहा है, जिसका असर विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।