यूएई में पाकिस्तानी कामगारों की वापसी: क्या है इसके पीछे का कारण?
पाकिस्तान और यूएई के रिश्तों में तनाव
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियों के चलते पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच संबंधों में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यूएई की नाराजगी ईरान पर हमलों की निंदा न करने के कारण पाकिस्तान पर असर डाल रही है।
पाकिस्तानी कामगारों की वापसी
रिपोर्टों के अनुसार, यूएई से बड़ी संख्या में पाकिस्तानी श्रमिकों को वापस भेजा जा रहा है। इसके अलावा, यूएई द्वारा पाकिस्तान को दिए गए 3.5 अरब डॉलर के कर्ज की वापसी की मांग ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को और भी चिंतित कर दिया है।
यूएई में पाकिस्तानी नागरिकों की संख्या
संयुक्त अरब अमीरात में 20 लाख से अधिक पाकिस्तानी नागरिक निवास करते हैं, जो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। पिछले वर्ष, इन प्रवासियों ने अपने देश को लगभग आठ अरब डॉलर भेजे थे। हालाँकि, हाल के दिनों में कई पाकिस्तानियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें यूएई के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट द्वारा हिरासत में लिया गया या देश छोड़ने के निर्देश दिए गए।
हिरासत और निष्कासन की घटनाएँ
कई पाकिस्तानी नागरिकों का कहना है कि उन्हें कई दिनों तक हिरासत में रखा गया और उनके खिलाफ कोई स्पष्ट आरोप नहीं लगाए गए। बाद में, उन्हें पाकिस्तानी दूतावास द्वारा जारी इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्यूमेंट के माध्यम से वापस भेजा गया। पूर्व सांसद नदीम अफजल के अनुसार, पंजाब प्रांत के उनके जिले से कम से कम 100 श्रमिकों को हाल ही में यूएई से निकाला गया है।
शिया समुदाय की वापसी
शिया समुदाय के नेताओं का कहना है कि उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के कई शिया बहुल गांवों में हाल के हफ्तों में लगभग 900 लोग वापस लौट चुके हैं। इस्लामाबाद के शिया धर्मगुरु मोहम्मद अमीन शहीदी ने बताया कि उनके संगठन ने यूएई से निकाले गए लगभग 5000 परिवारों का पंजीकरण किया है।
पाकिस्तान सरकार का इनकार
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस बात से इनकार किया है कि यूएई से बड़े पैमाने पर पाकिस्तानी नागरिकों को निकाला जा रहा है। मंत्रालय का कहना है कि जिन लोगों को वापस भेजा गया, वे किसी न किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल थे। हालांकि, यह भी चर्चा में है कि यूएई में रहने वाले लेबनान और इराक जैसे देशों के शिया समुदाय के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं की गई है।
विशेषज्ञों की राय
वाशिंगटन स्थित रिसर्च संस्थान 'अटलांटिक काउंसिल' के दक्षिण एशिया मामलों के सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन ने कहा कि यूएई इस बात से नाराज है कि पाकिस्तान के सऊदी अरब के साथ संबंध अभी भी मजबूत बने हुए हैं। इसके अलावा, वह उन कदमों से भी नाखुश हैं जो पाकिस्तान ने ईरान के करीब जाने के लिए उठाए हैं।
