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यूएई में पाकिस्तानी शिया मुसलमानों का अचानक निष्कासन: क्या है इसके पीछे की सच्चाई?

यूएई में पाकिस्तानी शिया मुसलमानों के अचानक निष्कासन की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे समुदाय में हड़कंप मच गया है। बिना किसी पूर्व सूचना के हजारों प्रवासियों को वापस भेजा जा रहा है, जबकि मानवाधिकार संगठन इस मामले की जांच कर रहे हैं। जानें इस संकट के पीछे की वजहें और प्रभावित लोगों की कहानियाँ।
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यूएई में पाकिस्तानी शिया मुसलमानों का अचानक निष्कासन: क्या है इसके पीछे की सच्चाई?

खाड़ी देशों में बढ़ता तनाव


नई दिल्ली: मिडल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर अब खाड़ी देशों में काम कर रहे विदेशी श्रमिकों के जीवन पर पड़ने लगा है। संयुक्त अरब अमीरात में लंबे समय से रह रहे हजारों पाकिस्तानी शिया मुसलमानों को अचानक नौकरी से निकालकर देश से वापस भेजा जा रहा है।


समुदाय में हड़कंप

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि इन प्रवासियों को न तो अपनी जमा-पूंजी निकालने का मौका मिल रहा है और न ही सामान समेटने का। बिना किसी पूर्व सूचना के हो रही इस कार्रवाई ने पाकिस्तान के शिया समुदाय में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मानवाधिकार संगठन 'ह्यूमन राइट्स वॉच' ने जांच शुरू कर दी है।


निष्कासन की गति में तेजी

रिपोर्टों के अनुसार, प्रवासियों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई में तेजी 28 फरवरी के बाद आई है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में ईरान ने यूएई की ओर मिसाइलें दागी थीं।


सुरक्षा पाबंदियों में वृद्धि

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा तनाव के बीच, यूएई सरकार ने सुरक्षा पाबंदियों को कड़ा कर दिया है। पाकिस्तान के शिया संगठनों का आरोप है कि भू-राजनीतिक सुरक्षा के नाम पर उनके समुदाय के लोगों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।


खौफनाक आंकड़े

पाकिस्तानी शिया राजनीतिक संगठन 'मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन' के अनुसार, 28 फरवरी से अब तक लगभग 7,500 पाकिस्तानी शियाओं को यूएई से वापस भेजा जा चुका है। संगठन के प्रवक्ताओं का कहना है कि यह केवल दर्ज आंकड़ा है, जबकि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।


प्रवासियों की आपबीती

डिपोर्ट किए गए लोगों की कहानियाँ चौंकाने वाली हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 103 लोगों के इमिग्रेशन दस्तावेजों की जांच में पता चला कि कई को उनके कार्यस्थलों से हिरासत में लिया गया। चकवाल के एक 41 वर्षीय पीड़ित ने बताया कि हिरासत के दौरान उनकी सैलरी और बैंकिंग लेनदेन की जांच की गई।


पीड़ितों की गवाही

एक अन्य पीड़ित ने बताया कि उन्हें बिना किसी कानूनी वारंट के गिरफ्तार किया गया और 9 दिनों तक अंधेरी कोठरी में रखने के बाद एयरपोर्ट ले जाकर डिपोर्ट कर दिया गया।


यूएई और पाकिस्तान का रुख

इस संवेदनशील मुद्दे पर यूएई का विदेश मंत्रालय चुप्पी साधे हुए है। वहीं, पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने कहा है कि यूएई ने किसी को उनके संप्रदाय के आधार पर नहीं निकाला है, बल्कि यह कार्रवाई स्थानीय वीजा नियमों के उल्लंघन के कारण हुई है।


पर्दे के पीछे की कहानी

इस्लामाबाद के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में शिया कामगारों के अचानक लौटने से उत्पन्न परिस्थितियों की सरकार गंभीरता से समीक्षा कर रही है।