यूक्रेन और भारत के बीच सुरक्षा सहयोग का नया अध्याय
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलस्की ने भारत के साथ सुरक्षा सहयोग के समझौते की घोषणा की है, जो रूस के साथ हालिया रीलॉस समझौते के बाद आया है। यह कदम यूक्रेन की बढ़ती चिंता को दर्शाता है, क्योंकि वे रूस के हमलों से बचने के लिए भारत की मदद की उम्मीद कर रहे हैं। जानें इस समझौते के पीछे की वजह और भारत की भूमिका के बारे में विस्तार से।
| Apr 20, 2026, 20:43 IST
यूक्रेन का भारत के साथ सुरक्षा समझौता
यूक्रेन ने हाल ही में रूस और भारत के बीच हुए रीलॉस समझौते के बाद, राष्ट्रपति जेलस्की ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने एक्स पर लिखा कि हम भारत के साथ सुरक्षा सहयोग के समझौते को अंतिम रूप देने जा रहे हैं। यह बयान उस दिन आया जब 18 अप्रैल को रूस ने भारत के साथ रीलॉस समझौते के दस्तावेज सार्वजनिक किए। इस समझौते के तहत, 3000 सैनिक, पांच युद्धपोत और 10 लड़ाकू विमानों की तैनाती की अनुमति मिलती है, जिससे यूक्रेन में चिंता बढ़ गई है। यूक्रेन को अब यह एहसास हुआ है कि भारत ही एक ऐसा देश है जो उन्हें रूस के हमलों से बचा सकता है, इसलिए जेलस्की भारत को रिझाने में जुट गए हैं। आज हम इस विषय पर चर्चा करेंगे कि कैसे भारत की ताकत ने यूक्रेन को सुरक्षा समझौते की ओर अग्रसर किया है।
जेलस्की ने कहा कि अगले सप्ताह वे अपने सहयोगियों के साथ सुरक्षा सहयोग पर महत्वपूर्ण घोषणाएं करने वाले हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हवाई सुरक्षा और सेना को समर्थन उनकी प्राथमिकता है और भारत के साथ उनका सुरक्षा सहयोग पहले से ही मौजूद है। 18 अप्रैल को रूस ने रीलॉस के दस्तावेज जारी किए, और 19 अप्रैल को जेलस्की ने भारत का नाम लिया, जो यूक्रेन की घबराहट को दर्शाता है। उन्हें लगता है कि भारत अब रूस के साथ गहरे संबंधों में है, और शायद भारत कुछ मध्यस्थता कर सके।
यूक्रेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सचिव रुस्तम उमेरोव ने 17 अप्रैल को दिल्ली में अजीत डोबाल और एस जयशंकर से मुलाकात की। इस बैठक में डोबाल ने स्पष्ट किया कि भारत शांति चाहता है और बातचीत के माध्यम से समाधान की तलाश कर रहा है। वहीं, उमेरोव ने स्थायी शांति के लिए समाधान खोजने पर सहमति जताई। इस बीच, जेलस्की ने भारत के साथ समझौते की फाइनल स्टेज की घोषणा की, जो दर्शाता है कि यूक्रेन अब रूस के हमलों से थक चुका है। युद्ध चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और पश्चिमी सहायता में कमी आई है, जिससे यूक्रेन को भारत की ओर रुख करना पड़ा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद, दोनों देशों के बीच नई गतिशीलता देखने को मिली है। अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूक्रेन यात्रा के दौरान, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया था। जेलस्की की हालिया घोषणा उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
