रूस का पेट्रोल निर्यात पर चार महीने का प्रतिबंध, भारत पर कम असर
रूस ने 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक पेट्रोल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है, जिसका वैश्विक बाजार पर बड़ा असर पड़ेगा। हालांकि, भारत इस स्थिति में अपेक्षाकृत सुरक्षित है क्योंकि वह रूस से कच्चा तेल खरीदता है, न कि पेट्रोल। जानें इस फैसले का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा और कैसे भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहा है।
| Mar 28, 2026, 20:20 IST
रूस में तापमान में वृद्धि और पुतिन का मछली पकड़ने का शौक
रूस की मीडिया ने एक वीडियो साझा किया है जिसमें दिखाया गया है कि जैसे-जैसे सर्दी खत्म हो रही है, तापमान में हल्की वृद्धि हो रही है। इस अवसर पर राष्ट्रपति पुतिन धूप का आनंद लेने के लिए मछली पकड़ने गए हैं। हालांकि, किसी ने नहीं सोचा था कि इस बढ़ते तापमान के बीच पुतिन एक ऐसा निर्णय लेंगे जो वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर देगा। दरअसल, ईरान में युद्ध के कारण पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में संकट के बीच, रूस ने घोषणा की है कि वह 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक किसी भी देश को पेट्रोल नहीं बेचेगा। इस प्रस्ताव को तैयार करने के लिए रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्जेंडर नोवाक ने ऊर्जा मंत्रालय को निर्देश दिए हैं।
रूस का पेट्रोल निर्यात प्रतिबंध
सरकारी समाचार एजेंसी TASS ने पहले बताया था कि यह प्रतिबंध 31 जुलाई तक प्रभावी रहेगा। नोवाक ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि विदेशी बाजारों में रूसी ऊर्जा संसाधनों की उच्च मांग एक सकारात्मक पहलू है। सरकार ने एक बयान में कहा कि कच्चे तेल के प्रसंस्करण की मात्रा पिछले वर्ष के स्तर पर बनी हुई है, जिससे तेल उत्पादों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। यूक्रेन द्वारा रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों और ईंधन की मौसमी मांग में वृद्धि के कारण पिछले वर्ष रूस के कई क्षेत्रों में गैसोलीन की कमी देखी गई थी। रूस ने ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बार-बार पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं। उद्योग के सूत्रों के अनुसार, देश ने पिछले वर्ष लगभग 50 लाख मीट्रिक टन पेट्रोल का निर्यात किया, जो लगभग 117,000 बैरल प्रति दिन के बराबर है।
भारत पर प्रभाव और स्थिति
रूस के इस निर्णय ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है, लेकिन भारत इस स्थिति में लाभ की स्थिति में दिखाई दे रहा है। रूस ने कहा है कि यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि देश में आपूर्ति बनी रहे और कीमतें नियंत्रित रहें। इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव चीन, तुर्की, ब्राजील, अफ्रीका और सिंगापुर पर पड़ेगा, जबकि भारत पर इसका असर कम होगा। इसका कारण यह है कि भारत रूस से पेट्रोल नहीं, बल्कि कच्चा तेल खरीदता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत पेट्रोल जैसे तैयार ईंधन पर निर्भर नहीं है, बल्कि कच्चे तेल पर निर्भर है। जानकारी के अनुसार, भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 20% रूस से आता है।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता
भारत अपने देश में बड़ी रिफाइनरियों के माध्यम से कच्चे तेल को प्रोसेस करके पेट्रोल और डीजल का उत्पादन करता है। आंकड़ों के अनुसार, भारत प्रतिदिन लगभग 56 लाख बैरल कच्चा तेल रिफाइन करता है। इस प्रक्रिया में भारत अपनी घरेलू जरूरतें पूरी कर लेता है और बाकी का तैयार पेट्रोल और डीजल निर्यात कर देता है। भारत तेल के लिए किसी एक देश या रूट पर निर्भर नहीं है और विभिन्न राज्यों के माध्यम से पेट्रोल का आयात करता है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
🚨The World Gone Mad - War Everywhere
— Ignorance, the root and stem of all evil (@ivan_8848) March 28, 2026
Moscow temperature SURGES to +17°C — so sunny Vladimir Putin is probably out on a fishing trip pic.twitter.com/NNOy6pRvw2
