रूस का भारत को एसयू 57 फाइटर जेट का प्रस्ताव: हवाई ताकत में बदलाव
हवा में युद्ध की नई परिभाषा
आज के युग में हवाई युद्ध का अर्थ केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्मार्ट सिस्टम, ड्रोन नेटवर्क और सामूहिक कार्य शामिल हैं। इस समय जब विश्व के कई क्षेत्रों में तनाव और संघर्ष जारी हैं, रूस ने भारत को एक ऐसा प्रस्ताव दिया है जो उसकी हवाई शक्ति को पूरी तरह से बदल सकता है। रूस ने भारत को दो सीटों वाला एसयू 57 स्टील फाइटर जेट देने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें पूरी तकनीकी हस्तांतरण शामिल है। यह प्रस्ताव विंग्स इंडिया 2026 एयर शो के दौरान प्रस्तुत किया गया। खास बात यह है कि यह दो सीट वाला एसयू 57 मानव रहित टीमिंग के लिए भी सक्षम है। इसका मतलब है कि यह युद्ध के मैदान में स्वायत्त ड्रोन को अपने नियंत्रण में ले सकता है।
एक हवाई कमांड सेंटर
यह केवल एक जेट नहीं है, बल्कि यह हवा में एक संपूर्ण कमांड सेंटर के रूप में कार्य करता है। यह प्रस्ताव भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह युद्ध के समय में आया है। रूस, जो स्वयं यूक्रेन के साथ संघर्ष में है, फिर भी भारत जैसे मित्र देश को अपनी अत्याधुनिक तकनीक देने के लिए तैयार है। यह भारत और रूस के बीच की गहरी और भरोसेमंद दोस्ती को दर्शाता है।
एसयू 57 की विशेषताएँ
एसयू 57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टील फाइटर जेट है, जिसे सुखोई डिजाइन ब्यूरो ने विकसित किया है। नाटो इसे फैलन के नाम से जानता है। यह जेट इतना उन्नत है कि यह दुश्मन के रडार पर कम दिखाई देता है, यानी यह अदृश्य रहता है। इसकी सुपर क्रूज क्षमता इसे बिना आफ्टर बर्नर के साउंड बैरियर तोड़ने की अनुमति देती है।
एसयू 57 में 360° सेंसर फ्यूजन तकनीक है, जो चारों ओर से आने वाली सूचनाओं को एकत्रित करके पायलट को स्पष्ट चित्र प्रदान करती है। इसके हथियार आंतरिक रूप से छिपे होते हैं, जिससे इसकी स्टाइल बनी रहती है। यह एयर टू एयर, एयर टू ग्राउंड और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में सक्षम है। हालांकि, सिंगल सीट वेरिएंट में पायलट को कई कार्य अकेले संभालने पड़ते थे। अब, दो सीटों वाले वेरिएंट में पायलट और सह-पायलट के बीच कार्य विभाजन किया जा सकता है।
